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केरल : 'एलडीएफ के अलावा और कौन है' नारा फेल: पूर्व मंत्री पी. राजीव ने पार्टी की गलतियों को खुलकर माना

 

तिरुवनंतपुरम, 16 जून (आईएएनएस)। लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को चुनाव में मिली हार के बाद, पूर्व मंत्री पी. राजीव ने खुलकर माना है कि सीपीआई (एम) के कई राजनीतिक आकलन गलत साबित हुए। इनमें पार्टी का चुनावी नारा 'एलडीएफ के अलावा और कौन है?' भी शामिल है। पार्टी का अब मानना ​​है कि यह नारा मतदाताओं के बीच वैसी छाप नहीं छोड़ पाया, जैसी उम्मीद थी।

दूसरी पिनाराई विजयन सरकार में सीपीआई(एम) के सीनियर नेता और उद्योग मंत्री राजीव उन 13 मंत्रियों में शामिल थे जो विधानसभा चुनाव हार गए। यह हार हाल के वर्षों में वामपंथियों के लिए सबसे बड़े झटकों में से एक थी।

इन बयानों ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है क्योंकि ये हार के बाद गलतियों को अंदरूनी तौर पर स्वीकार करने का संकेत देते हैं।

राजीव के अनुसार, पार्टी ने यह निष्कर्ष निकाला है कि उस नारे ने लोगों के बीच एक अलग धारणा बनाई।

उन्होंने कहा कि एलडीएफ की अपील को मजबूत करने के बजाय, इसने मतदाताओं के बीच यह भावना पैदा की कि गठबंधन खुद को एकमात्र विकल्प के तौर पर पेश कर रहा था।

उन्होंने यह भी माना कि पार्टी एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने में नाकाम रही और इस मामले को संभालने में चूक हुई।

राजीव ने कहा, "कंप्यूटर पर बटन दबाने की तरह चीजों को पहले जैसा करना संभव नहीं है।" उन्होंने कहा कि इस अनुभव ने पार्टी को भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने का सबक सिखाया है।

इन बयानों ने केरल सीपीआई(एम) के खिलाफ पुरानी आलोचना को फिर से हवा दे दी है कि पार्टी अक्सर राजनीतिक हालात के दबाव में अपना रुख बदल लेती है। आलोचक ट्रैक्टर, कंप्यूटर और सेल्फ-फाइनेंसिंग प्रोफेशनल कॉलेजों के प्रति पार्टी के शुरुआती विरोध का उदाहरण देते हैं, ये ऐसे मुद्दे थे जिन्हें बाद में हकीकत के तौर पर स्वीकार कर लिया गया और पार्टी खुद इनकी सबसे बड़ी समर्थक बन गई।

विरोधियों का तर्क है कि पार्टी का तरीका यही रहा है कि पहले बदलावों का विरोध किया जाए और बाद में जब जमीनी हालात बदल जाएं तो उन्हें स्वीकार कर लिया जाए।

राजीव की बात को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, क्योंकि पार्टी एक अप्रत्याशित हार के बाद अपनी दिशा सुधारने की कोशिश कर रही है।

सबरीमाला में सोने की चोरी के मुद्दे पर राजीव ने कहा कि पार्टी का नजरिया संगठनात्मक तकनीकी बारीकियों में उलझने के बजाय कार्रवाई करने पर केंद्रित होना चाहिए था।

यह हार तब हुई जब राजीव और उनके कैबिनेट सहयोगियों को भरोसा था कि पिनाराई विजयन लगातार तीसरी बार सत्ता में आकर इतिहास रचेंगे।

इसके बजाय, एलडीएफ को चुनावी मोर्चे पर बड़ी हार का सामना करना पड़ा, जिससे पार्टी को अपनी रणनीति, संदेश और संगठनात्मक कामकाज पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

--आईएएनएस

एससीएच/एएस