अफ्रीका फॉरवर्ड समिट में आर्थिक असमानता दूर करने और नए वित्तीय ढांचे की जरूरत पर जोर
नैरोबी, 12 मई (आईएएनएस)। अफ्रीका फॉरवर्ड समिट का पहला आयोजन मंगलवार को खत्म हो गया, और इसमें दुनिया के नेताओं और अफ्रीकी देशों के प्रमुखों ने मिलकर एक नए वित्तीय ढांचे की जरूरत पर जोर दिया, ताकि अफ्रीका की आर्थिक क्षमता को बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सके।
इस दो दिन के सम्मेलन की सह-अध्यक्षता केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने की। इसमें 20 से ज्यादा देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों के प्रमुख, और 2,500 से ज्यादा बिजनेस लीडर्स, निवेशक और युवा इनोवेटर्स शामिल हुए।
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अपने उद्घाटन भाषण में रूटो ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था “ढांचे के हिसाब से असमान” है।
उन्होंने बताया कि अफ्रीकी देशों पर कर्ज लेने की लागत बहुत ज्यादा है और उन्हें आसान (रियायती) फाइनेंस तक सीमित पहुंच मिलती है। इसका एक कारण यह भी है कि जोखिम को लेकर गलत धारणा बनाई जाती है, जो असल आर्थिक स्थिति को सही तरीके से नहीं दिखाती।
उन्होंने कहा, “हमारे सामने का समय मजबूत सहयोग, नए सिरे से बहुपक्षीय साझेदारी, और ऐसी भागीदारी की मांग करता है जो किसी ऊंच-नीच पर नहीं, बल्कि बराबरी, आपसी सम्मान और साझा जिम्मेदारी पर आधारित हो।”
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि अफ्रीका के सामने आर्थिक असंतुलन न तो टिकाऊ है और न ही न्यायसंगत। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्तीय ढांचा अफ्रीका के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास में सबसे बड़ी रुकावट है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि मौजूदा वैश्विक वित्तीय संस्थाएं अफ्रीका के विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मदद नहीं दे पा रही हैं। उन्होंने सुधार की मांग की ताकि अफ्रीकी देशों को सस्ता कर्ज मिल सके, वे अपने कर्ज को बेहतर तरीके से संभाल सकें, और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में उनकी आवाज और मजबूत हो।
उन्होंने यह भी कहा कि अफ्रीका को अपनी घरेलू संसाधन जुटाने की क्षमता बढ़ानी चाहिए, ताकि आर्थिक बदलाव को आगे बढ़ाया जा सके और उस वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर निर्भरता कम हो सके जिसे उन्होंने “पुरानी और असमान” बताया।
अफ्रीकी संघ आयोग के अध्यक्ष महमूद अली यूसुफ ने बताया कि अफ्रीका के पास घरेलू पूंजी का बड़ा भंडार है, खासकर पेंशन और बीमा फंड के रूप में, लेकिन उसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अफ्रीका अब ऐसी वित्तीय संस्थाएं बना रहा है जो अफ्रीका द्वारा खुद संचालित हों, ताकि विदेशी लोन देने वालों और क्रेडिट सिस्टम पर निर्भरता कम की जा सके।
--आईएएनएस
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