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अभिजीत दिपके की समर्थकों से अपील, त्योहार अपने परिवारों के साथ मनाएं और नफरत से दूर रहें

 

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पार्टी समर्थकों से त्योहारों के दौरान अपने परिवारों के साथ समय बिताने की अपील की है और उनसे कहा है कि वे किसी के भी प्रति मन में नफरत न रखें।

मंगलवार को दिपके की ओर से जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने उन कठिनाइयों को स्वीकार किया, जिनका सामना उनके समर्थकों के साथ उनके परिवारों को हाल के महीनों में करना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से आप सभी सड़कों पर कड़ा संघर्ष कर रहे हैं और आपने बहुत कुछ सहा है। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूं कि मेरे साथ इतने नेक और ईमानदार लोग हैं, जो उस चीज के लिए लड़ रहे हैं जिस पर वे विश्वास करते हैं और जो सही है।

दिपके ने कहा कि मैं जानता हूं कि इन महीनों में आप किन हालात से गुजरे हैं और हमारे परिवारों ने भी बहुत कुछ सहा है। मैं सभी साथियों से आग्रह करता हूं कि वे अपने परिवारों के साथ कुछ समय बिताएं। उनके परिवार निश्चित रूप से चिंतित होंगे।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन नफरत के खिलाफ है और समर्थकों को आगाह किया कि वे अपने बीच ऐसी भावना को पनपने न दें।हम नफरत के खिलाफ लड़ रहे हैं। वह नफरत हमारे भीतर नहीं आनी चाहिए।

उनका यह संदेश तब आया है जब सीजेपी के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका को दो और दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इन दोनों को दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में अवैध रूप से प्रवेश करने और कथित तौर पर बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सोमवार को दिल्ली की एक अदालत ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी।

अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए और उनकी रिहाई की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की जा रही है।

दिपके ने आंदोलन में दास और रांका की भूमिका की सराहना की, उन्हें आंदोलन की रीढ़ बताया और कहा कि उनका योगदान बहुत बड़ा रहा है।

उन्होंने समर्थकों से यह भी अपील की कि वे उनकी गिरफ्तारी से निराश न हों। हम पीछे नहीं हटेंगे। अगर आशु और सौरभ जेल में हैं, तो हम डरेंगे नहीं। हम सही चीज के लिए लड़ रहे हैं।

महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए उन्होंने इन दोनों नेताओं की जेल यात्रा की तुलना सत्याग्रह से की और कहा कि गांधीजी भी मुस्कुराते हुए जेल गए थे।

उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे त्योहारों के दौरान दास और रांका को याद रखें, क्योंकि वे अपने परिवारों के साथ त्योहार नहीं मना पाएंगे।

दिपके ने भारत के इस आंदोलन की तुलना नेपाल और बांग्लादेश के आंदोलनों से किए जाने को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका अभियान अहिंसा और गांधीवादी सिद्धांतों पर आधारित है। इस सुझाव को खारिज करते हुए कि मुख्य न्यायाधीश पीछे हट गए हैं, उन्होंने कहा कि हम डरते नहीं हैं। कोई हमें डरा नहीं सकता।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी