तमिलनाडु: डेयरी किसान की आविन के दूध खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग, मौजूदा दरों पर जताई चिंता
चेन्नई, 20 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के डेयरी किसानों ने राज्य सरकार से आविन के दूध खरीद मूल्य में संशोधन करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत के बीच मौजूदा खरीद दरों पर डेयरी व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया है।
किसानों का कहना है कि आविन द्वारा दिए जा रहे खरीद मूल्य और निजी डेयरी कंपनियों की ओर से मिलने वाली दरों के बीच बढ़ते अंतर के कारण कई दूध उत्पादक सरकारी सहकारी संस्था से दूरी बना रहे हैं।
आविन राज्य सरकार की प्रमुख डेयरी सहकारी संस्था है, जो पूरे तमिलनाडु की सहकारी समितियों के बड़े नेटवर्क के जरिए दूध खरीदती है। दशकों से ये समितियां किसानों को दूध बेचने के लिए एक भरोसेमंद बाजार उपलब्ध कराती रही हैं। हालांकि, अब डेयरी किसान आरोप लगा रहे हैं कि दूध खरीद की कीमतों में लंबे समय से बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि पशुपालन से जुड़ी लागत काफी बढ़ गई है।
किसानों के अनुसार, आविन वर्तमान में औसतन करीब 34 रुपए प्रति लीटर की दर से दूध खरीद रही है, जबकि कई निजी डेयरी कंपनियां 50 रुपए प्रति लीटर तक कीमत दे रही हैं। कुछ किसान सीधे घरों में दूध बेचकर इससे भी ज्यादा कमाई कर रहे हैं, जहां दूध की कीमत करीब 62 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच जाती है।
निजी खरीदारों और सीधे बिक्री से मिलने वाले ज्यादा दाम के कारण आविन की सहकारी समितियों को मिलने वाले दूध की मात्रा लगातार कम हो रही है। किसानों का कहना है कि समस्या केवल कम खरीद मूल्य की नहीं है, बल्कि डेयरी खेती की बदलती आर्थिक स्थिति भी इसकी एक बड़ी वजह है।
किसानों का कहना है कि पहले गांवों में मवेशी आम जमीनों पर आसानी से चर लेते थे, जिससे चारे पर खर्च कम होता था। लेकिन अब चरागाहों की कमी के कारण किसानों को पूरे साल हरा चारा खरीदना पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है।
कई किसानों का कहना है कि मौजूदा खरीद मूल्य से केवल उत्पादन लागत ही निकल पा रही है और दूध बिक्री से बहुत कम या कोई आय नहीं बचती। इसके चलते कई किसानों ने दूध देने वाले पशुओं की संख्या कम कर दी है, जबकि कुछ ने डेयरी व्यवसाय ही छोड़ दिया है।
किसानों ने पशुओं की बीमारी से होने वाली मौतों और दूध उत्पादन में कमी को भी एक बड़ी समस्या बताया है।
किसान संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि आविन का दूध खरीद मूल्य निजी डेयरी कंपनियों के बराबर किया जाए। उनका कहना है कि बेहतर खरीद मूल्य मिलने से किसान दोबारा सहकारी नेटवर्क से जुड़ेंगे, आविन की दूध संग्रह व्यवस्था मजबूत होगी और पूरे तमिलनाडु में उपभोक्ताओं के लिए दूध की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
--आईएएनएस
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