भीषण सूखे की चपेट में कर्नाटक, लोगों को संकट नहीं झेलने देंगे: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर
चित्रदुर्ग, 25 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक इस वर्ष भीषण सूखे का सामना कर रहा है। राज्य की लगभग 80 प्रतिशत झीलें सूख चुकी हैं और जलाशयों का जलस्तर भी बेहद निचले स्तर पर पहुंच गया है। उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने शनिवार को कहा कि सरकार स्थिति की गंभीरता से पूरी तरह अवगत है और किसी भी हाल में लोगों को इस संकट का खामियाजा नहीं भुगतने दिया जाएगा।
परमेश्वर ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ चित्रदुर्ग जिले के हिरियूर तालुक का दौरा कर सूखा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने मुरुघराजेंद्र बृहन्मठ के अनुभव मंटप सभागार में आयोजित बेंगलुरु राजस्व मंडल स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि सूखे के कारण सबसे बड़ी चुनौती पीने के पानी की कमी हो सकती है। इसलिए जलाशयों में उपलब्ध पानी का उपयोग केवल पेयजल के लिए किया जाएगा और कृषि कार्यों में इसका इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 42 प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी दर्ज की गई है। जून में कुछ क्षेत्रों में बारिश हुई, लेकिन वह समान रूप से नहीं हुई। किसानों ने बुवाई शुरू की थी, लेकिन बारिश की कमी के कारण कई जिलों में कृषि गतिविधियां लगभग ठप हो गई हैं।
उन्होंने बताया कि चिकलबल्लापुर में केवल 2 प्रतिशत, कोलार में 1.5 से 2 प्रतिशत, चित्रदुर्ग में 3 से 4 प्रतिशत और कुछ इलाकों में करीब 10 प्रतिशत तक ही बुवाई हो सकी है। पूरे राज्य में सामान्य बुवाई का केवल 15 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है।
परमेश्वर ने कहा कि प्रशांत महासागर के सतही तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण सुपर एल-नीनो की स्थिति बनी है, जिससे वर्षा प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले 75 वर्षों में 25 बार एल-नीनो की स्थिति बनी, लेकिन इस बार समुद्र के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि सुपर एल-नीनो के कारण दुनिया के लगभग आधे हिस्से में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। यह केवल कर्नाटक की समस्या नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों के साथ-साथ यूरोप भी भीषण गर्मी और सूखे की मार झेल रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि बेंगलुरु राजस्व मंडल के विभिन्न जिलों में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है। बेंगलुरु शहरी में 28 प्रतिशत, बेंगलुरु ग्रामीण में 18 प्रतिशत, रामनगर में 24 प्रतिशत, कोलार में 36 प्रतिशत, चिक्कबल्लापुर में 28 प्रतिशत, तुमकुरु में 18 प्रतिशत, चित्रदुर्ग में 28 प्रतिशत तथा दावणगेरे और शिवमोग्गा में 48-48 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है। पूरे बेंगलुरु राजस्व मंडल में औसतन 37 प्रतिशत वर्षा की कमी रही है।
परमेश्वर ने कहा कि जल संकट से निपटने के लिए निजी बोरवेल किराये पर लिए जा रहे हैं और टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति की जा रही है। सरकार ने प्रत्येक जिले को 5 करोड़ रुपये पेयजल व्यवस्था के लिए जारी किए हैं। इसके अलावा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए 1 करोड़ रुपये की सहायता भी स्वीकृत की गई है।
उन्होंने कहा कि राज्य में लाखों पशुधन हैं और चारे का संकट भी पैदा हो सकता है। फिलहाल अगले 30 से 40 सप्ताह के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध है। जिन क्षेत्रों में पानी उपलब्ध है, वहां किसानों को चारा उत्पादन के लिए बीज किट वितरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि बागलकोट, विजयपुरा, कोप्पल, बल्लारी और यादगिर जिलों से लोगों के पलायन की खबरें सामने आई हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित गांवों में तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकारी योजनाओं के तहत कार्य शुरू किए जाएं। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
परमेश्वर ने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री तथा केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर राज्य की सूखा स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने केंद्र सरकार से सूखा घोषित करने के लिए निर्धारित 10 मानकों में ढील देने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि 15 अगस्त से पहले केंद्र सरकार को सूखा संबंधी ज्ञापन नहीं भेजा जा सकता। यदि अगस्त में अच्छी बारिश होती है तो हालात बदल सकते हैं, इसलिए अंतिम रिपोर्ट भेजने में कुछ समय लग सकता है।
--आईएएनएस
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