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जम्मू कश्मीर में नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को मजबूत करने पर जोर, 4,000 नए कांस्टेबल तकनीकी भूमिकाओं में किया जाएगा इस्तेमाल

 

श्रीनगर, 10 मई (आईएएनएस)। जम्‍मू-कश्‍मीर में नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को मजबूत करने और पेशेवर क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए 4,000 से ज्‍यादा कांस्टेबल को खास तकनीकी भूमिकाओं के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें 600 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं।

डीजीपी नलिन प्रभात ने रविवार को कहा कि जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस के नए भर्ती हुए कांस्टेबल पढ़े-लिखे और तकनीकी रूप से कुशल युवाओं की एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो आने वाले वर्षों में फोर्स को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

जेवान के आर्म्ड पुलिस कॉम्प्लेक्स में नए भर्ती हुए कांस्टेबलों को उपराज्‍यपाल मनोज सिन्हा ने नियुक्ति पत्र सौंपे। समारोह में कांस्टेबलों को संबोधित करते हुए डीजीपी ने कहा कि इन कांस्टेबलों में बी-टेक और एम-टेक पास उम्मीदवार भी शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल फोर्स के अंदर खास तकनीकी भूमिकाओं में किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इन पदों के लिए 5.5 लाख से ज्‍यादा आवेदन मिले थे, जिनका विज्ञापन 2024 में दिया गया था। चुने गए कई उम्मीदवार ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट, बी-टेक और एम-टेक डिग्री धारक हैं।

डीजीपी ने कहा कि ऐसे उच्च शिक्षित रंगरूटों की पहचान ट्रेनिंग के दौरान की जाएगी और उनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), सीसीपीएस और अन्य टेक्नोलॉजी-आधारित पुलिस प्रणालियों से जुड़े खास और तकनीकी क्षेत्रों में किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पुलिस फोर्स में उच्च शिक्षित युवाओं की भर्ती उनके देशभक्ति और राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को मजबूत करने और पेशेवर क्षमताओं को बेहतर बनाने की जरूरत बढ़ रही है। नए भर्ती हुए कांस्टेबलों को फोर्स की रीढ़ बताते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस की वर्दी अनुशासन, ईमानदारी, वफादारी, साहस, बलिदान और जन सेवा के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

उन्होंने रंगरूटों से आग्रह किया कि वे ट्रेनिंग के समय का पूरा इस्तेमाल करें और ईमानदारी और समर्पण के साथ पुलिसिंग के हर पहलू को सीखें।

डीजीपी ने आगे कहा कि देश के कई अन्य पुलिस संगठनों के विपरीत जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस अनोखी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करती है, जहां पुलिसिंग पारंपरिक कानून-व्यवस्था के कर्तव्यों से कहीं आगे तक जाती है।

उन्‍होंने जवानों से कहा कि हमारी चुनौतियां अलग हैं और हमारी जिम्मेदारियां व्यापक हैं। प्रशिक्षण प्रक्रिया के दौरान हम आपको इन चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए न केवल शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक और पेशेवर रूप से भी तैयार करेंगे।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी