मध्य प्रदेश : कुनो में चीते की मौत मामले में कार्रवाई, चार वन अधिकारी निलंबित, तीन आरोपी गिरफ्तार
भोपाल, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक चीते को मौत के घाट उतारने के मामले में चार वन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, जांच के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
मामले की जांच कर रही राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने मुरैना-श्योपुर क्षेत्र में करीब 20 लोगों से पूछताछ की है। साथ ही शिकार गतिविधियों में संलिप्त होने के संदेह में कई घरों की तलाशी भी ली गई है, हालांकि जांच एजेंसियां अभी तक उस हथियार को बरामद नहीं कर सकी हैं, जिससे चीते को गोली मारी गई थी।
चार वनकर्मियों के निलंबन की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब कुनो नेशनल पार्क की सीमा से बाहर निकलकर आसपास के वन क्षेत्रों में जाने वाले चीतों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
मृत चीते की पहचान केएनजी-22 के रूप में हुई है। यह 19 महीने का नर चीता था, जिसका जन्म दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता निरवा से हुआ था।
यह चीता 25 अक्टूबर को मुरैना जिले के एक वन क्षेत्र में घायल अवस्था में मिला था। यह स्थान कुनो नेशनल पार्क के संरक्षित क्षेत्र से बाहर था।
निगरानी टीम ने चीते को बचाकर उपचार के लिए पहले कुनो के पशु चिकित्सा केंद्र पहुंचाया। बाद में उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय रेफर किया गया।
जानकारी के अनुसार, सीटी स्कैन में चीते के आंतरिक अंगों, मांसपेशी तंत्र और तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति पहुंचने का पता चला।
आपातकालीन सर्जरी के दौरान पशु चिकित्सकों ने उसके शरीर से गोली के पांच छर्रे बरामद किए। तमाम प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह उसकी मौत हो गई।
जांचकर्ताओं को आशंका है कि चीते पर पारंपरिक 'भरमार' बंदूक से फायरिंग की गई थी, लेकिन संबंधित हथियार अभी तक बरामद नहीं हुआ है। घटना की जांच के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 27 अक्टूबर को वन और पुलिस अधिकारियों की एक चार सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया था।
इसके अलावा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) के अधिकारियों सहित तीन सदस्यीय केंद्रीय टीम को भी मामले की जांच और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए तैनात किया गया है।
इस घटना ने कुनो नेशनल पार्क से सटे क्षेत्रों में चीतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं, खासकर तब जब वे संरक्षित क्षेत्र से निकलकर खुले वन क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं।
--आईएएनएस
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