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पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश होंगे चार विधेयक, यूसीसी को लेकर बनी अनिश्चितता

 

कोलकाता, 29 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन और ओबीसी आरक्षण संशोधन शामिल हैं। वहीं, अन्य दो विधेयक राज्य में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी की गतिविधियों को रोकने से संबंधित हैं।

हालांकि, इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित प्रस्तावित विधेयक पेश किया जाएगा या मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी प्रस्तावित यूसीसी विधेयक की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति के गठन की घोषणा करेंगे।

हालांकि, विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा इन दोनों संभावनाओं की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है लेकिन घटनाक्रम से अवगत सूत्रों का कहना है कि दूसरे विकल्प के पूरे होने की संभावना पर जोर है। गठित की जाने वाली समिति की अध्यक्षता के लिए सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (सेवानिवृत्त) से संपर्क किया जा सकता है।

25 जून को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के विधानसभा पहुंचने के बाद ही इस बात पर चर्चा शुरू हो गई कि समान नागरिक संहिता विधेयक सोमवार को सदन में पेश किया जा सकता है। इसी दिन विधानसभा सत्र के पहले भाग में अपने भाषण में भी मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने समान नागरिक संहिता विधेयक का समर्थन किया था। इसके बाद उसी रात उन्होंने एक पार्टी कार्यक्रम में भी यही बात दोहराई।

मुख्यमंत्री की टिप्पणी के बाद सदन में भाजपा के विधायक दल ने इस विधेयक को पेश करने की तैयारी शुरू कर दी। हालांकि, सत्ताधारी दल की संसदीय दल की टीम से इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है कि इसे सोमवार को पेश किया जाएगा या नहीं।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भाजपा विधायक दल ने समान नागरिक संहिता विधेयक पर चर्चा के लिए एक घंटे का समय निर्धारित किया है। फिलहाल, सत्तारूढ़ दल ने तय किया है कि सीएम सुवेंदु अधिकारी ही इस विधेयक के पक्ष में बोलने वाले एकमात्र वक्ता होंगे, और बाद में भाजपा के अन्य वक्ताओं के नाम भी जोड़े जा सकते हैं।

विधानसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, यद्यपि भाजपा विधायक दल ने इस संबंध में तैयारियां कर ली हैं, फिर भी सोमवार के लिए तैयार कार्यसूची में अन्य चार विधेयकों का उल्लेख है। इसमें समान नागरिक संहिता विधेयक का जिक्र नहीं है। परिणामस्वरूप, इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि सरकार इस विधेयक के संबंध में वास्तव में क्या करना चाहती है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम