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बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिरों पर हमले और मूर्तियां तोड़ने की 34 घटनाएं दर्ज

 

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले मंदिरों पर हमले, मूर्तियों को खंडित करने और हिंसा की अन्य घटनाओं के कुल 34 मामले सामने आए हैं। स्थानीय मीडिया ने दो हिंदू संगठनों के हवाले से शुक्रवार को यह जानकारी दी।

धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग करते हुए बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद और महानगर सर्वजनिन पूजा समिति ने अधिकारियों से आगे होने वाले हमलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और पूरे साल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, दोनों संगठनों ने गुरुवार को ढाका स्थित ढाकेश्वरी राष्ट्रीय मंदिर परिसर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह मांग उठाई। यह संवाददाता सम्मेलन शारदीय दुर्गा पूजा से पहले आयोजित किया गया था।

बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद के महासचिव संतोष शर्मा ने कहा, "इस साल एक उल्लेखनीय बात यह है कि अब तक मूर्तियों को खंडित करने, मंदिरों पर हमले और इस तरह की अन्य घटनाओं के कुल 34 मामले सामने आए हैं।"

संगठनों के नेताओं ने उम्मीद जताई कि दुर्गा पूजा शांतिपूर्ण तरीके से और बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न होगी। उन्होंने जोर दिया कि धार्मिक त्योहारों को सभी समुदायों के लोगों को एकजुट करना चाहिए और बांग्लादेश की सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को मजबूत करना चाहिए।

संगठनों की ओर से जारी बयान के अनुसार, सिलहट, राजबाड़ी, पंचगढ़ और टांगाइल सहित कई जिलों में त्योहार की तैयारियों के दौरान मूर्तियों को खंडित करने और मंदिरों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं।

बयान में फरीदपुर के एक ऐतिहासिक काली मंदिर में चोरी की घटना का भी उल्लेख किया गया। इसके अलावा, सुनामगंज में हिंदू समुदाय के लोगों के घरों, दुकानों और मंदिरों पर हमले तथा लूटपाट की घटनाओं का जिक्र किया गया है।

संगठनों ने नाओगांव में हुई एक लूट की घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर कुछ लोगों ने खुफिया एजेंसी के अधिकारियों के रूप में अपनी पहचान बताई थी। दोनों संगठनों के नेताओं ने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को मजबूत करने और सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ सामाजिक प्रतिरोध बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "पूजा के पांच दिनों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। साल के 365 दिन सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।"

नेताओं ने कहा कि भेदभाव-मुक्त बांग्लादेश के निर्माण के लिए धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को बनाए रखना और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाना जरूरी है।

बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच यह मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान शुरू हुआ यह सिलसिला मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार के कार्यकाल में भी जारी है।

इस सप्ताह की शुरुआत में ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (एचआरसीबीएम) ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच देश में धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाली 498 कथित घटनाओं का ब्योरा जारी किया था। इनमें हत्या, मारपीट, यौन हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमले और संपत्ति से जुड़े उल्लंघनों के मामले शामिल थे।

एचआरसीबीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, "हर घटना की जांच होनी चाहिए। हर पीड़ित सुरक्षा का हकदार है। दोषियों को दंड से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।" संगठन ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई।

--आईएएनएस

डीएससी