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टीडीपी में 33 प्रतिशत महिला कोटा भारतीय राजनीति में एक 'गेम-चेंजिंग पल' है: राम मोहन नायडू

 

अमरावती, 27 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजारापु ने बुधवार को तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) की ओर से महिलाओं को लेकर किए गए बड़े ऐलान को भारतीय राजनीति में 'गेम-चेंजिंग मोमेंट' बताया।

उन्होंने कहा कि 2029 के चुनावों में पार्टी के भीतर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि देश की राजनीति में बदलाव की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।

टीडीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नारा लोकेश ने पार्टी के वार्षिक अधिवेशन 'महानाडु' में यह प्रस्ताव रखा। यह दो दिवसीय कार्यक्रम आंध्र प्रदेश के मंगलगिरि स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में शुरू हुआ।

राम मोहन नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि टीडीपी हमेशा से देश में प्रगतिशील और जन-केंद्रित राजनीति की अगुआ रही है। उन्होंने कहा कि माताओं, बहनों और बेटियों को नेतृत्व की भूमिका में आगे लाकर और उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के लिए मजबूत मंच देकर पार्टी ने एक बार फिर महिला सशक्तीकरण और समावेशी शासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

उन्होंने कहा कि महिलाएं सिर्फ राष्ट्र निर्माण की सहभागी नहीं हैं, बल्कि भारत के भविष्य की वास्तुकार हैं। उनके मुताबिक, आंध्र प्रदेश में आज जो बीज बोया गया है, वह आने वाले समय में राजनीति और समाज दोनों में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने इसे समान अवसर, मजबूत प्रतिनिधित्व और बेहतर भविष्य की दिशा में एक आंदोलन बताया।

इस बीच, टीडीपी का 'हाइब्रिड महानाडु 2026' भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पार्टी का दावा है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक सम्मेलन नहीं, बल्कि तकनीक आधारित संगठनात्मक प्रबंधन और डिजिटल जनसंपर्क का बड़ा उदाहरण है।

पार्टी नेताओं के अनुसार, इस बार महानाडु को इस तरह डिजाइन किया गया ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आसानी से जुड़ सकें और कम खर्च में पूरे राज्य से भागीदारी सुनिश्चित हो सके। टीडीपी के मुताबिक, इस आयोजन में करीब 7 लाख कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें कई लोग सीधे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो बड़ी संख्या में लोग डिजिटल माध्यम से जुड़े।

इसके लिए पूरे आंध्र प्रदेश में लगभग 1,875 डिजिटल 'महानाडु क्लस्टर सेंटर' बनाए गए। इन केंद्रों पर एलईडी स्क्रीन, इंटरनेट कनेक्टिविटी, ऑडियो सिस्टम और लाइव स्ट्रीमिंग की व्यवस्था की गई थी। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के कार्यकर्ता भी भाषण सुन सके, चर्चाओं में हिस्सा ले सके और प्रस्तावों पर रियल टाइम में मतदान कर सके।

पार्टी नेताओं का कहना है कि इस मॉडल से यात्रा और ठहरने का खर्च काफी कम हुआ और महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ी, जो आमतौर पर लंबी दूरी तय नहीं कर पाते।

टीडीपी ने माईटीडीपी प्लेटफॉर्म के जरिए जीपीएस आधारित डिजिटल निमंत्रण प्रणाली भी लागू की। कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत निमंत्रण भेजे गए, जिनमें जियोलोकेशन तकनीक के जरिए उन्हें उनके सबसे नजदीकी क्लस्टर सेंटर से जोड़ा गया। इससे भीड़ प्रबंधन आसान हुआ और उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया गया।

पूरे कार्यक्रम की निगरानी के लिए एक केंद्रीय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी बनाया गया था। यहां से राज्यभर के क्लस्टर सेंटरों की लाइव फीड, इंटरनेट कनेक्टिविटी, उपस्थिति और भागीदारी के आंकड़ों पर नजर रखी गई। तकनीकी टीमों ने किसी भी समस्या का तुरंत समाधान सुनिश्चित किया।

पार्टी नेताओं के मुताबिक, यह सिस्टम बड़े कॉर्पोरेट टेक इवेंट्स की तरह काम कर रहा था, जहां रियल टाइम एनालिटिक्स और लाइव मॉनिटरिंग के जरिए पूरे आयोजन को सुचारू रूप से संचालित किया गया।

--आईएएनएस

वीकेयू/डीकेपी