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गोल्डी बराड़-लिपिन नेहरा गैंग के पकड़े गए दो गुर्गे, हथियार और जिंदा कारतूस बरामद

 

नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली। पुलिस ने गोल्डी बराड़-लिपिन नेहरा गैंग के दो कुख्यात सदस्यों को गिरफ्तार किया और उनके पास से बड़ी संख्या में हथियार बरामद किए। दोनों हरियाणा के झज्जर और रेवाड़ी के रहने वाले हैं।

बरामद हथियारों में छह आधुनिक फायरआर्म्स, आठ जिंदा कारतूस और दो सिंगल शॉट पिस्टल शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रणदीप उर्फ रिंकू (36) और हितेश कुमार (23) के रूप में हुई है।

दोनों को दिल्ली पुलिस की एंटी-गैंगस्टर स्क्वॉड (एजीएस) और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनकी कार भी जब्त कर ली है।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी गैंग के लिए अवैध हथियारों की सप्लाई करने और वसूली से मिली रकम गैंग के सदस्यों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते थे। यह काम वे लिपिन नेहरा के निर्देश पर करते थे। दोनों हरियाणा में रंगदारी से जुड़े कई फायरिंग मामलों में भी शामिल रहे हैं।

पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है, ताकि बरामद हथियारों के असली स्रोत का पता लगाया जा सके और गैंग के अन्य सदस्यों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों में से एक ने हरियाणा के एक कारोबारी से एक करोड़ रुपए रंगदारी मांगी थी। पिछले साल उसने अपने साथियों के साथ मिलकर लिपिन नेहरा के कहने पर कारोबारी को धमकियां भी दी थीं।

जांच में पुलिस को पता चला कि कनाडा में बैठा लिपिन नेहरा भारत में अपने साथियों को एन्क्रिप्टेड सिग्नल ऐप के जरिए निर्देश देता था कि वे अवैध हथियारों और गोला-बारूद की खेप हासिल करें।

गैंग ने खास तौर पर हितेश और रणदीप राठी को हथियारों की खेप लेने की जिम्मेदारी दी थी।

एनसीआर क्षेत्र में संगठित अपराध, रंगदारी और अवैध हथियारों के इस्तेमाल के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए क्राइम ब्रांच की एंटी-गैंगस्टर स्क्वॉड (एजीएस) को ऐसे अपराधियों पर नजर रखने और दिल्ली व आसपास के राज्यों में सक्रिय गैंग के सदस्यों की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

पुलिस टीम ने गैंग के सदस्यों के ठिकानों, गतिविधियों, साथियों और उनके आपराधिक नेटवर्क के बारे में पुख्ता जानकारी जुटाई और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की। टीम ने गुप्त मुखबिरों की मदद से मानव खुफिया जानकारी भी जुटाई और लगातार निगरानी रखी।

गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने दिल्ली के द्वारका स्थित यूईआर-2 के पास ताजपुर इलाके में जाल बिछाया। निगरानी के दौरान आरोपी कार में आते दिखाई दिए। पुलिस को देखकर उन्होंने भागने की कोशिश की, लेकिन छापेमारी करने वाली टीम ने उन्हें पकड़ लिया।

पुलिस अब इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि गैंग अवैध हथियारों की खेप की तस्करी कैसे करता था, गैंगवार के लिए हथियार कैसे पहुंचाए जाते थे और कारोबारियों को धमकाकर रंगदारी वसूलने का पूरा नेटवर्क कैसे काम करता था।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम