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एथेनॉल संचालित वाहनों की तरफ एक प्रतिशत बदलाव से भारत करीब 195 करोड़ रुपए की कर सकता है बचत: हरदीप पुरी

 

नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। भारत में एक वर्ष में बिकने वाले कुल वाहनों में से अगर एथेनॉल संचालित वाहनों की हिस्सेदारी अगर एक प्रतिशत हो जाए तो देश एक एथेनॉल सप्लाई ईयर में करीब 195 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत कर सकता है। यह बयान केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को दिया।

राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाजार में फ्लेक्स-फ्यूल मोबिलिटी की शुरुआत आयातित जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ परिवहन विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ने के भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पुरी ने कहा, “यह कदम न केवल देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि घरेलू स्तर पर उत्पादित जैव ईंधनों को बढ़ावा देने की सरकार की व्यापक रणनीति को भी समर्थन देगा।”

मंत्री ने आगे कहा कि बड़े पैमाने पर फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की शुरुआत आज से हो गई है। साथ ही उन्होंने परिवहन क्षेत्र में एथेनॉल-आधारित ईंधनों के उपयोग को बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया।

उन्होंने घोषणा की कि ई85 ईंधन, जिसमें पेट्रोल के साथ 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है, देश भर के निर्दिष्ट ईंधन वितरण केंद्रों पर उपलब्ध कराया जाएगा।

पुरी के अनुसार, ई85 ईंधन पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता होगा, जिससे यह उपभोक्ताओं के लिए एक आकर्षक और किफायती विकल्प बन जाएगा।

पुरी ने बताया, "एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को अधिक अपनाने से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए भारत के आयात बिल में काफी कमी आ सकती है, साथ ही घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल की अतिरिक्त मांग भी पैदा हो सकती है।"

जीवाश्म ईंधन आयात को कम करने, कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने और जैव ईंधन मूल्य श्रृंखला के माध्यम से किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर प्रदान करने की अपनी रणनीति के तहत भारत पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण लगातार बढ़ा रहा है।

इस बीच, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले महीने स्वदेशी एथेनॉल आधारित चूल्हे की तकनीक का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की तुलना में कम लागत पर खाना पकाने के लिए उपयुक्त लौ उत्पन्न कर सकती है।

25 मई को नागपुर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, गडकरी ने कहा कि यह नई तकनीक खाना पकाने के लिए उपयुक्त लौ उत्पन्न करने के लिए एथेनॉल और पानी के मिश्रण का उपयोग करती है।

मंत्री ने कहा, “पानी में 7 प्रतिशत इथेनॉल मिलाकर चूल्हे जैसी लौ उत्पन्न की जा सकती है, और यह खाना पकाने की गैस से भी सस्ती है। यह हमारे देश में ही विकसित की गई है।”

--आईएएनएस

एबीएस