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हिमाचल सरकार का सख्त फैसला, रिटायर्ड कर्मचारियों की दोबारा नियुक्ति पर रोक

 

शिमला, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने रिटायर हो चुके कर्मचारियों को दोबारा सेवा में रखने की प्रथा पर सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश सरकार ने सभी विभागों में एक्सटेंशन, री-एम्प्लॉयमेंट और री-एंगेजमेंट पर रोक लगा दी है।

सरकार ने 2 अप्रैल को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रिटायर्ड प्रोफेसरों को दोबारा नियुक्त करने का निर्णय लिया था, जिसमें उन्हें 2.50 लाख रुपए से अधिक मासिक मानदेय देने का प्रावधान रखा गया, हालांकि सरकार के नए आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि अन्य विभागों में ऐसे प्रस्ताव अब आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे।

कार्मिक विभाग द्वारा जारी 'अत्यंत आवश्यक' निर्देशों में संयुक्त सचिव (कार्मिक) नीरज कुमार ने सभी प्रशासनिक सचिवों को सख्त हिदायत दी कि रिटायरमेंट के बाद किसी भी नियुक्ति प्रस्ताव को न तो प्रोसेस करें और न ही आगे भेजें। आदेश में कहा गया है कि ऐसे मामलों पर किसी भी स्तर पर विचार नहीं किया जाएगा।

इसके साथ ही जिन अधिकारियों को एक्सटेंशन या री-एम्प्लॉयमेंट दिया गया है, उन्हें स्वीकृत अवधि पूरी होने के बाद स्वतः सेवानिवृत्त माना जाएगा। बिना औपचारिक अनुमति अब सेवा जारी रखने की अनुमति नहीं होगी।

जारी किए गए आदेश में सभी विभागों को तुरंत अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसे सरकार की प्रशासनिक पारदर्शिता और सख्ती की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

लंबे समय से रिटायर्ड अधिकारियों को बार-बार सेवा विस्तार देने की प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं। इसे 'बैकडोर एंट्री' का माध्यम बताते हुए आलोचना होती रही है, जिससे नए भर्ती के अवसर प्रभावित होते हैं और निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं।

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने विभागों को ऐसे मामलों की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए हैं, खासकर उन कर्मचारियों के मामले जिनकी कार्यशैली या ईमानदारी को लेकर शिकायतें हैं। जरूरत पड़ने पर ऐसी सेवाओं को समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

सरकार के इस आदेश के बाद अब विभिन्न विभागों में चल रहे एक्सटेंशन और री-एम्प्लॉयमेंट के मामलों की समीक्षा तेज होने की संभावना है, जिससे बड़ी संख्या में ऐसे अधिकारियों पर असर पड़ सकता है जो वर्तमान में अनुबंध, सलाहकार या विस्तार के आधार पर सेवाएं दे रहे हैं।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी