हिमाचल प्रदेश: गुरु अमर दास साहिब के ज्योति जोत दिवस के मौके पर कीर्तन और कवि दरबार का आयोजन
नाहन, 27 सितंबर (आईएएनएस)। सिरमौर जिले के ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पोंटा साहिब में सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमर दास साहिब महाराज के ज्योति जोत दिवस (पुण्यतिथि) के मौके पर कीर्तन समागम और कवि दरबार जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पांवटा साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के मैनेजर गुरमीत सिंह ने कहा, "तीसरे सिख गुरु, गुरु अमर दास महाराज के ज्योति जोत दिवस के उपलक्ष्य में ऐतिहासिक गुरुद्वारा पांवटा साहिब में कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। देर रात एक विशेष कवि दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के साथ हुई।"
गुरु अमर दास साहिब महाराज सिख धर्म के तीसरे गुरु थे, जिन्होंने समानता, सेवा और मानवता के प्रचार-प्रसार में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका जन्म 5 मई 1479 (वैशाख शुक्ल 14) को अमृतसर के 'बासरके' (बसारके) गांव में हुआ था। उनका विवाह मंसा देवी से हुआ था। उनकी चार संतान (मोहरी, मोहन, दानी और भानी) थीं।
गुरु अमर दास साहिब को 19 मार्च 1552 को खडूर साहिब में श्री गुरु अंगद देव द्वारा तीसरी गुरू गद्दी पर सुशोभित किया गया था। 22 वर्षों तक वे गुरु पद पर रहे थे। उन्होंने 'पहले पंगत फिर संगत' के नियम को कड़ाई से लागू किया, जिसके तहत छोटे-बड़े सब एक साथ जमीन पर बैठकर लंगर छकते थे। इससे छुआछूत और ऊंच-नीच का भेद समाप्त हुआ। इसके अलावा उन्होंने सती प्रथा, पर्दा प्रथा का विरोध, विधवा विवाह की इजाजत और आनंद साहिब की बाणी जैसे बड़े सुधार भी किए।
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