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तलाक मामलों में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पारिवारिक न्यायालय जाने की कोई समय सीमा नहीं

 

राजस्थान हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि तलाक या विवाह विच्छेद से संबंधित मामलों में पारिवारिक न्यायालय (Family Court) में जाने के लिए कोई अधिकतम समय सीमा लागू नहीं होती।

अदालत ने कहा कि वैवाहिक संबंधों से जुड़े विवादों की प्रकृति निरंतर चलने वाली होती है और ऐसे मामलों में समय सीमा का कठोर प्रतिबंध लगाना न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा। इसलिए पीड़ित पक्ष कभी भी पारिवारिक न्यायालय का रुख कर सकता है, बशर्ते उसका दावा कानून के अन्य प्रावधानों के अनुरूप हो।

हाईकोर्ट का यह निर्णय उन मामलों के संदर्भ में आया है, जहां विवाह विच्छेद या वैवाहिक अधिकारों से जुड़े विवादों में देरी के आधार पर याचिकाओं को खारिज किए जाने की स्थिति बन रही थी। अदालत ने इस प्रवृत्ति पर स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि पारिवारिक मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण अधिक संवेदनशील होना चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उन लोगों के लिए राहतभरा है जो व्यक्तिगत, सामाजिक या पारिवारिक कारणों से तुरंत कानूनी कार्रवाई नहीं कर पाते। अब वे बाद में भी अपने अधिकारों के लिए न्यायालय में आवेदन कर सकेंगे।

हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियों को अलग-अलग आधार पर देखा जाएगा और केवल समय बीत जाने के आधार पर किसी भी याचिका को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।

इस फैसले को पारिवारिक न्याय व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो वैवाहिक विवादों में न्याय की प्रक्रिया को और अधिक लचीला और न्यायसंगत बनाता है।

कुल मिलाकर, राजस्थान हाईकोर्ट का यह निर्णय तलाक और विवाह विच्छेद से जुड़े मामलों में न्याय पाने की प्रक्रिया को आसान बनाता है और यह स्पष्ट करता है कि पारिवारिक न्यायालय जाने के लिए कोई निर्धारित अधिकतम समय सीमा लागू नहीं होगी।