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Heritage Story: 400 साल पुराना दतिया का सतखंडा महल, जहां मेहमान के लिए बना महल हमेशा रहा वीरान
 

 

मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित वीर सिंह देव पैलेस, जिसे सतखंडा महल के नाम से भी जाना जाता है, बुंदेला काल की भव्य स्थापत्य कला का अनोखा उदाहरण है। सात मंजिला इस विशाल इमारत की सबसे दिलचस्प कहानी यह है कि इसे जिस शाही मेहमान के स्वागत के लिए बनवाया गया था, वह यहां लंबे समय तक ठहर ही नहीं सका।


जहांगीर के स्वागत के लिए कराया गया निर्माण
दतिया के बुंदेला शासक राजा वीर सिंह देव और मुगल राजकुमार सलीम, जो बाद में सम्राट जहांगीर बने, के बीच करीबी संबंध बताए जाते हैं। इसी संबंध की याद में राजा वीर सिंह देव ने दतिया में एक भव्य महल बनवाने का फैसला किया था।
बताया जाता है कि उनका उद्देश्य मुगल बादशाह के दतिया आने पर इसी महल में उनके ठहरने और स्वागत की व्यवस्था करना था।
17वीं सदी में तैयार हुआ भव्य महल
सतखंडा महल के निर्माण को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग तारीखें मिलती हैं। कुछ विवरणों में इसकी नींव 1614 में रखे जाने की बात कही गई है, जबकि अन्य दस्तावेजों में निर्माण का समय 1614 से 1623 के बीच बताया गया है।
करीब नौ साल में तैयार हुए इस महल की लागत भी उस दौर के हिसाब से काफी अधिक बताई जाती है। इसकी विशाल संरचना में सैकड़ों कमरे, आंगन, झरोखे और बालकनियां बनाई गई हैं।
बिना लकड़ी और लोहे के बनी संरचना
महल की वास्तुकला की सबसे खास बात इसका निर्माण है। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, इसके निर्माण में मुख्य रूप से चूना, पत्थर और ईंटों का इस्तेमाल किया गया। महल की संरचना में लकड़ी और लोहे के गर्डरों का इस्तेमाल नहीं किए जाने की बात भी कही जाती है।
महल के निचले हिस्सों में बने तहखाने गर्मी के मौसम में अपेक्षाकृत ठंडे रहते थे। इसकी ऊंची इमारत और जटिल वास्तुशैली आज भी पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करती है।
सैकड़ों कमरे और खूबसूरत नक्काशी
सतखंडा महल में करीब 400 से 440 कमरों का उल्लेख विभिन्न विवरणों में मिलता है। इसके अलावा यहां विशाल आंगन, बगीचे, झरोखे और सजावटी बालकनियां भी हैं।
महल की दीवारों और संरचना पर बुंदेला शैली की नक्काशी और सजावटी काम दिखाई देता है। परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थापत्य के विभिन्न रूप भी देखने को मिलते हैं, जो उस दौर की स्थापत्य परंपराओं की झलक देते हैं।
शाही निवास नहीं बन सका महल
इतनी भव्य इमारत होने के बावजूद सतखंडा महल किसी शाही परिवार का नियमित निवास नहीं बन पाया। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर इसे कभी-कभी 'बदनसीब महल' भी कहा जाता है।
आज यह दतिया की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है। ऊंचाई पर स्थित इस महल से आसपास के क्षेत्र और कर्ण सागर झील का सुंदर दृश्य दिखाई देता है। करीब चार सदियों बाद भी सतखंडा महल बुंदेला स्थापत्य की भव्यता और दतिया के इतिहास की एक महत्वपूर्ण पहचान बना हुआ है।