यहां शादी के बाद पति का घर छोडकर पडोसी के साथ रहती है दुल्हन, ऐसे रस्म के पीछे आखिर कहानी क्या है?
चीन की सांस्कृतिक विविधता और प्राचीन परंपराओं के कारण कई ऐसे रिवाज देशभर में प्रचलित हैं, जो अन्य देशों के लिए अजीब और रोचक लग सकते हैं। ऐसा ही एक रिवाज शादी के बाद नई-नवेली दुल्हन से जुड़ा है, जो कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है। चीन के कुछ इलाकों में शादी के बाद दुल्हन को अपने पति के घर नहीं बल्कि किसी और के घर में रहना पड़ता है।
यह परंपरा “बियाई याओ” या स्थानीय भाषाओं में इसके अलग-अलग नामों से जानी जाती है। रस्म के अनुसार, शादी के तुरंत बाद दुल्हन को पति के घर भेजने के बजाय उसे किसी परिचित महिला या रिश्तेदार के घर में कुछ दिनों के लिए रहना पड़ता है। इस दौरान दुल्हन को नए परिवार और जिम्मेदारियों की शिक्षा दी जाती है, उसे घरेलू कार्यों और सामाजिक आदतों के बारे में मार्गदर्शन मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिवाज के पीछे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारण हैं। प्राचीन चीन में विवाह केवल दो परिवारों के बीच संबंध बनाने का माध्यम नहीं था, बल्कि दुल्हन की सामाजिक शिक्षा और उसके चरित्र निर्माण का तरीका भी माना जाता था। पति के घर भेजने से पहले कुछ समय किसी अन्य परिवार के साथ रहने से यह सुनिश्चित किया जाता था कि दुल्हन स्वावलंबी, समझदार और घरेलू कामों में दक्ष हो।
सामाजिक वैज्ञानिक बताते हैं कि यह रस्म परिवारों को जोड़ने का माध्यम भी थी। दुल्हन के रहने से दूसरे परिवार के सदस्यों के बीच आपसी संबंध मजबूत होते थे और नए जीवन की शुरुआत में दुल्हन को समर्थन मिलता था। यह परंपरा परिवार और समाज दोनों में सामंजस्य और सहयोग की भावना पैदा करती थी।
हालांकि, आधुनिक चीन में यह रिवाज अब कम ही प्रचलित है, खासकर शहरी क्षेत्रों में। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी यह रस्म कुछ हद तक जिंदा है। कई बार यह रस्म धार्मिक या शुभ संकेत के रूप में भी देखी जाती है, ताकि नई शादी में खुशहाली और समृद्धि बनी रहे।
सोशल मीडिया पर हाल ही में इस रिवाज का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें देखा गया कि दुल्हन को शादी के बाद कुछ दिनों के लिए अपने पति के करीबी महिला रिश्तेदार के घर में भेजा गया। वीडियो देखने वालों का कहना था कि यह रिवाज शुरुआती तौर पर अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे सांस्कृतिक और पारिवारिक कारणों की गहराई है।
इस घटना ने यह सवाल भी उठाया कि समय के साथ बदलाव के बावजूद प्राचीन परंपराओं का समाज में क्या स्थान होना चाहिए। कई लोग इसे सांस्कृतिक पहचान और विरासत का हिस्सा मानते हैं, जबकि अन्य इसे आधुनिक सोच के हिसाब से चुनौतीपूर्ण मानते हैं।