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महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में तीखी बहस, एक्सक्लुसीव वीडियो में देखें पक्ष-विपक्ष में जोरदार टकराव

 

लोकसभा में आज महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन बिल पेश किए गए, जिस पर सदन में गहन चर्चा और तीखी बहस देखने को मिली। करीब डेढ़ घंटे बाद यह मतदान हुआ कि इन बिलों पर आगे चर्चा की जाए या नहीं। वोटिंग में 251 सांसदों ने पक्ष में समर्थन दिया, जबकि 185 सांसदों ने विरोध जताया।

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विपक्षी दलों ने इन बिलों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने बिलों का विरोध करते हुए कहा कि सरकार संविधान को “हाईजैक” करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।

इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण का स्पष्ट लाभ नहीं मिलेगा, तब तक इस कानून का कोई वास्तविक अर्थ नहीं है। उनके बयान के बाद सदन में राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है और ऐसा सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने साफ किया कि भारत का संविधान धर्म आधारित आरक्षण की अनुमति नहीं देता।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरा देश महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन उनकी पार्टी यह जानना चाहती है कि मुस्लिम महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान क्या होगा।

इसके जवाब में अमित शाह ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी चाहती है तो वह अपनी सभी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, इस पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं होगी। उनके इस बयान के बाद सदन में राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया।

पूरे घटनाक्रम के दौरान लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। महिला आरक्षण बिल को लेकर यह बहस आगामी दिनों में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।