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हर सीन की माइक्रो डिटेल समझते हैं गुलशन देवैया, तभी तो कहलाते हैं 'चलता-फिरता एनसाइक्लोपीडिया'

 

मुंबई, 27 मई (आईएएनएस)। बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया में कई कलाकार आते हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे होते हैं जो पूरे किरदार को समझकर उसे जीवंत बना देते हैं। ऐसे ही एक अभिनेता हैं गुलशन देवैया, जिन्हें उनके को-स्टार्स और डायरेक्टर्स अक्सर 'चलता-फिरता एनसाइक्लोपीडिया' भी कहते हैं, क्योंकि उन्हें स्क्रिप्ट, डायलॉग और सीन की हर बारीकी की गहरी समझ होती है। यह खासियत उनकी परफॉर्मेंस में साफ दिखाई देती है।

28 मई 1978 को बेंगलुरु में जन्मे गुलशन देवैया का फिल्मी सफर किसी आम अभिनेता जैसा नहीं रहा। उनका शुरुआती जीवन कला और क्रिएटिविटी से जुड़ा रहा। उन्होंने अपनी पढ़ाई एनएफटी से फैशन डिजाइनिंग में की और बाद में फैशन इंडस्ट्री में करीब 10 साल तक काम भी किया। इस दौरान उन्होंने सिर्फ डिजाइनिंग ही नहीं बल्कि फैशन एजुकेशन भी पढ़ाया। लेकिन उनका मन हमेशा अभिनय की तरफ खिंचता रहा, जिसके चलते उन्होंने बेंगलुरु में इंग्लिश थिएटर से जुड़कर एक्टिंग की शुरुआत की। थिएटर के शुरुआती दिनों में वे बैकस्टेज काम और लाइटिंग तक संभालते थे। इससे उन्हें स्टेज की गहराई से समझ मिली।

गुलशन देवैया का बॉलीवुड डेब्यू 2010 में अनुराग कश्यप की फिल्म 'दैट गर्ल इन येलो बूट्स' से हुआ। हालांकि, उन्हें असली पहचान 2011 में आई फिल्म 'शैतान' से मिली, जिसमें उन्होंने करण चौधरी 'केसी' का किरदार निभाया। इस फिल्म में उनकी परफॉर्मेंस को काफी सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू के लिए नामांकन भी मिला।

इसके बाद गुलशन ने लगातार अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। 'हेट स्टोरी' (2012) में उन्होंने एक ग्रे और नेगेटिव शेड वाला किरदार निभाया, जिसने दर्शकों का ध्यान खींचा। 'राम-लीला' (2013) में उन्होंने भवानी का रोल निभाया, जो कहानी का एक अहम और नकारात्मक किरदार था। इस फिल्म में भी उनकी स्क्रीन प्रेजेंस को खूब सराहा गया। 'हंटर' (2015) में उन्होंने मंदार पोंक्षे का किरदार निभाया, जो पूरी तरह बोल्ड कॉमेडी ड्रामा था, और यहां भी उन्होंने अपने अभिनय से अलग छाप छोड़ी।

उनकी सबसे खास फिल्मों में से एक 'मर्द को दर्द नहीं होता' (2018) रही, जहां उन्होंने डबल रोल निभाया। कराटे मणि और जिमी जैसे दो बिल्कुल अलग किरदारों को उन्होंने इतनी आसानी से पेश किया कि दर्शक हैरान रह गए। इसी तरह 'बधाई दो' (2022) में छोटे लेकिन प्रभावशाली रोल में उन्होंने कहानी को मजबूत बनाया। ओटीटी पर ' दहाड़' (2023) में उनका एसएचओ देवीलाल सिंह का किरदार काफी गंभीर था, जिसे दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों ने पसंद किया।

वेब सीरीज की दुनिया में भी गुलशन देवैया ने अपनी अलग पहचान बनाई। 'अफसोस', 'दुरंगा', 'गन्स एंड गुलाब्स' और 'बैड कॉप' जैसी सीरीज में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर यह दिखाया कि वे हर जॉनर में फिट हो सकते हैं। खासकर 'गन्स एंड गुलाब्स' में उनका 'फोर कट आत्माराम' किरदार ओटीटी का एक आइकॉनिक रोल बन गया।

अपने करियर में गुलशन देवैया ने कई अवॉर्ड और नामांकन भी हासिल किए हैं, जिनमें फिल्मफेयर और स्क्रीन अवॉर्ड के नॉमिनेशन शामिल हैं।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम