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हर दिन सिर्फ गेहूं की रोटी क्यों? बदल-बदल कर खाएं अनाज, शरीर रहेगा ज्यादा स्वस्थ

 

नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय खाने में रोटी सिर्फ भोजन का हिस्सा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा है। चाहे गांव हो या शहर, अमीर हो या गरीब, हर घर की रसोई में दिन में कम से कम एक बार तो रोटी जरूर बनती है। ज्यादातर लोग गेहूं की रोटी खाकर ही अपना पेट भरते हैं और यही उन्हें सबसे सामान्य भोजन लगता है, लेकिन आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही यह मानते हैं कि अलग-अलग अनाज से बनी रोटियों का शरीर पर अलग असर होता है।

आयुर्वेद के अनुसार, हर अनाज की अपनी प्रकृति और गुण होते हैं। कुछ अनाज शरीर को गर्म रखते हैं, कुछ पाचन को मजबूत बनाते हैं और कुछ शरीर को ताकत देने में मदद करते हैं। वहीं, वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि अलग-अलग अनाज में मौजूद फाइबर, विटामिन, मिनरल और प्रोटीन शरीर के अलग-अलग हिस्सों को फायदा पहुंचाते हैं, इसलिए अगर हम समय-समय पर अलग तरह की रोटियां खाते हैं तो शरीर को ज्यादा संतुलित पोषण मिल सकता है।

सबसे पहले गेहूं की रोटी की बात करते हैं। भारत में सबसे ज्यादा यही रोटी खाई जाती है। गेहूं में प्राकृतिक रूप से फाइबर, प्रोटीन और विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। विज्ञान के अनुसार, फाइबर पाचन तंत्र को सही तरीके से काम करने में मदद करता है और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। आयुर्वेद भी मानता है कि गेहूं शरीर को ऊर्जा देने वाला अनाज है। गेहूं की रोटी शरीर को ताकत देने में मददगार होती है। इसका नियमित सेवन शरीर को स्थिर ऊर्जा देता है और थकान कम महसूस होती है।

अगर बाजरे की रोटी की बात करें तो इसे पोषण का खजाना कहा जाता है। बाजरे में आयरन, कैल्शियम और फाइबर अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार बाजरा शरीर को गर्म रखने वाला अनाज है, इसलिए सर्दियों में इसका सेवन ज्यादा लाभकारी माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो बाजरे में मौजूद आयरन खून बनाने में मदद करता है, जिससे एनीमिया की समस्या में फायदा हो सकता है। वहीं कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है।

ज्वार की रोटी भी सेहत के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है। ज्वार में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। फाइबर पाचन को मजबूत बनाता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ज्वार का सेवन वजन को नियंत्रित रखने में भी मदद कर सकता है, क्योंकि इसे खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती। आयुर्वेद में भी ज्वार को हल्का और पचने में आसान अनाज माना गया है। यही वजह है कि जिन लोगों को पेट से जुड़ी परेशानी रहती है, उनके लिए ज्वार की रोटी अच्छा विकल्प मानी जाती है।

उत्तर भारत में मक्के की रोटी का खास महत्व है। खासकर सर्दियों में मक्के की रोटी और सरसों का साग एक लोकप्रिय भोजन माना जाता है। मक्के में कार्बोहाइड्रेट और फाइबर मौजूद होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं। इसके अलावा, इसमें कुछ ऐसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं जो आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार मक्का शरीर को मजबूती देने वाला अनाज है और इसे संतुलित मात्रा में खाने से शरीर को अच्छा पोषण मिल सकता है।

--आईएएनएस

पीके/डीकेपी