ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों पर पृथ्वीराज चव्हाण बोले- दोनों आयुक्तों के 14 पत्रों को किया जाए सार्वजनिक
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के मोर्चा खोलने के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। चव्हाण ने दावा किया कि जब दो चुनाव आयुक्तों ने ही सीईसी के फैसलों पर 14 बार लिखित ऐतराज जताया तो इससे साफ है कि आयोग के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है।
कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों पर कहा, "अभी हमारे सामने सबसे जरूरी मुद्दा चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के समय में हुई कथित गड़बड़ियों और गैर-कानूनी कामों को लेकर चल रहा आंदोलन है। राहुल गांधी ने भी यह मुद्दा उठाया है। सबसे पहले, आइए इलेक्शन कमीशन से जुड़े कानूनी नियमों पर गौर करें।"
उन्होंने कहा कि हमने कानून बनाकर तीन सदस्यों वाला चुनाव आयोग बनाया था, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले में हर सदस्य की ताकत और अधिकार साफ तौर पर बताए गए हैं। इलेक्शन कमीशन के सभी फैसले या तो आम सहमति से या बहुमत से लिए जाने हैं।
महाराष्ट्र के पूर्व सीएम ने कहा कि अगर आम सहमति नहीं बनती है, तो बहुमत के आधार पर फैसला किया जाता है। इसलिए स्थिति बिल्कुल साफ है। कई महीनों से दोनों चुनाव आयुक्तों की बातों को नजरअंदाज किया जा रहा था।
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सीधी सी बात यह है कि अगर दो इलेक्शन कमिश्नर ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर के काम पर ऐतराज जताते हुए 14 लेटर लिखे हैं, तो उन लेटर को पब्लिक किया जाना चाहिए। इससे साफ पता चलता है कि इलेक्शन कमीशन के अंदर अलग-अलग राय है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि हमारा कहना यह है। कानून कहता है कि इलेक्शन कमीशन के सभी फैसले बहुसंख्यकों से लिए जाने चाहिए। अगर दो चुनाव आयुक्त किसी खास एक्शन के पक्ष में हैं तो वे बहुमत बनाते हैं। इसलिए अगर कोई एक्शन उनके विचारों और पक्ष के खिलाफ लिया गया है तो वह गैरकानूनी है। इस मामले में चुनाव जीतने या हारने का सवाल ही कहां उठता है।
--आईएएनएस
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