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गुजरात: सोमनाथ में पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत, मंदिर को भारतीय सभ्यता की हिम्मत का प्रतीक बताया

 

सोमनाथ, 10 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गृह राज्य गुजरात के दौरे पर हैं। पीएम मोदी शनिवार को सोमनाथ पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ। सोमनाथ पहुंचने पर उन्होंने खुशी जताई और इसे भारतीय सभ्यता की हिम्मत का एक गौरवशाली प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री के सोमनाथ पहुंचने पर स्थानीय नागरिकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी के सड़क मार्ग से अपनी गंतव्य की तरफ जाते समय भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। इस दौरान पीएम मोदी ने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया। उन्होंने सोमनाथ दौरे की तस्वीर आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर पोस्ट की।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, "सोमनाथ में आकर बहुत अच्छा लग रहा है, जो हमारी सभ्यता की हिम्मत का एक गौरवशाली प्रतीक है। यह यात्रा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान हुई है, जब पूरा देश सन् 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के हजार साल पूरे होने पर एक साथ आया है। गर्मजोशी से स्वागत के लिए लोगों का आभारी हूं।"

दरअसल, पीएम मोदी 10-11 जनवरी को गुजरात के सोमनाथ की यात्रा पर हैं। यह कार्यक्रम सोमनाथ मंदिर पर प्रथम आक्रमण के बाद से अटूट भावना और सभ्यतागत निरंतरता के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे और ओंकार मंत्र के जाप में भी भाग लेंगे।

पीएम मोदी रविवार की सुबह लगभग 9.45 बजे शौर्य यात्रा में भाग लेंगे। यह एक औपचारिक शोभा यात्रा है, जो सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित की जाती है।

शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकलेगा, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक होगा। इसके बाद, लगभग 10.15 बजे प्रधानमंत्री सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। पीएम मोदी लगभग 11 बजे सोमनाथ में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे और एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, जो 8 जनवरी को शुरू हुआ, 11 जनवरी 2026 तक चलेगा। सोमनाथ में आयोजित किया जा रहा यह पर्व भारत के उन असंख्य नागरिकों की स्मृति में मनाया जा रहा है जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए बलिदान दिया और जो आने वाली पीढ़ियों की सांस्कृतिक चेतना को प्रेरित करते रहेंगे।

सदियों से इसे नष्ट करने के कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज भी सुगमता, आस्था और राष्ट्रीय गौरव के एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में मौजूद है। इसका श्रेय इसे इसके प्राचीन वैभव में पुनर्स्थापित करने के सामूहिक संकल्प और प्रयासों को जाता है।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी