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गुजरात में 226 करोड़ रुपए के संदिग्ध क्रिप्टो नेटवर्क का पर्दाफाश, कई आरोपी गिरफ्तार

 

गांधीनगर, 5 जून (आईएएनएस)। गुजरात के गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने टेररिस्ट फंडिंग नेटवर्क, इंटरनेशनल ड्रग्स नेटवर्क और डार्क वेब से जुड़े 226 करोड़ रुपए से ज्यादा के क्रिप्टो करेंसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इसी के साथ साइबर पुलिस ने 'डर्टी क्रिप्टो' को यूएसडीटी में बदलने वाले गैंग के आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है।

इसी को लेकर संजय केशवलाल, पुलिस अधीक्षक, साइबर अपराध ने बताया कि आजकल बढ़ते साइबर क्राइम को रोकने के लिए डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी), सीआईडी क्राइम और रेलवे, डॉ के लक्ष्मी नारायण राव और डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीआईजी), बिपिन अहीर ने सख्त और गहन कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, जिसके अनुसार एसपी, डॉ राजदीप सिंह झाला और एसपी संजय केशवाला और एसपी विवेक भेड़ा ने अलग-अलग टीमें बनाईं। उन्होंने ह्यूमन सोर्स और टेक्निकल एनालिसिस की मदद से इस पूरे मामले में 10 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया था। क्राइम में फिलहाल 2 और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की टेक्निकल यूनिट ने क्रिप्टो करेंसी के ब्लॉकचेन और उसके ट्रांजैक्शन को एनालाइज करके एक बहुत बड़े इंटरनेशनल फाइनेंशियल नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह नेटवर्क डार्क वेब पर नशीली दवाओं की बिक्री, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी संगठनों की फंडिंग में शामिल पाया गया है।

इन सभी आरोपों को मद्देनजर रखते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में बताए गए क्रिप्टो वॉलेट सब्बीर अली सरानी नाओ की जांच के दौरान पता चला कि उसके छोटे बेटे हदीरजा शब्बीर अली सरानी और दोस्त मोहम्मद जमीन अब्बास अली जिगर नाओ ने एक-दूसरे की मदद से सब्बीर अली सरानी नाओ की केवाईसी डिटेल्स हासिल कीं और (डर्टी क्रिप्टो) का वॉलेट खोला और गैर-कानूनी फंडिंग की।

आरोपियों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड 2023 के सेक्शन 111(2)(बी), 153, 61 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2008 के सेक्शन 66(सी) और 66(डी) के तहत एक ऑर्गनाइज्ड गैंग बनाने, फाइनेंशियल चैनलों के जरिए आतंकवादी गतिविधियों में मदद करने की साजिश रचने और एक दोस्त देश की सुरक्षा के खिलाफ काम करने के लिए एक स्टैंडर्ड शिकायत दर्ज की गई है।

इसी के साथ साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने जनता से अपील की है कि आप अपने बैंक अकाउंट किराए पर न दें। अनजान लोगों को कुछ कमीशन या लालच की आड़ में अपने बैंक अकाउंट का इस्तेमाल और इसमें ट्रांजैक्शन न करने दें। ऐसे किराए के अकाउंट का गलत इस्तेमाल ड्रग्स, साइबर फ्रॉड या टेररिस्ट फंडिंग जैसे गंभीर और देश विरोधी अपराधों के लिए किया जा सकता है, जिसमें अकाउंट होल्डर कानूनी मुश्किल में भी पड़ सकता है।

इसी के साथ उन्होंने लोगों को अगाह किया कि अनजान क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन से बचें, क्योंकि क्रिप्टोकरेंसी के पी-टू-पी (पीयर-टू-पीयर) प्लेटफॉर्म पर अकाउंट का गलत इस्तेमाल ड्रग्स, साइबर फ्रॉड या टेररिस्ट फंडिंग जैसे गंभीर और देश विरोधी अपराधों के लिए किया जा सकता है, जिसमें अकाउंट होल्डर कानूनी मुसीबत में भी पड़ सकता है।

इसके अलावा उन्होंने लोगों को अनजान क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन से बचने की सलाह दी और बताया कि क्रिप्टोकरेंसी के (पीयर-टू-पीयर) प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग करते समय अनजान और संदिग्ध लोगों से फंड लेने से बचें। ये फंड विदेशी टेररिस्ट संगठनों या मनी लॉन्ड्रिंग के हो सकते हैं। इसी के साथ लालची स्कीम से सावधान रहें। टेलीग्राम, वॉट्सऐप या दूसरे सोशल मीडिया के जरिए अनजान लोगों द्वारा दी जाने वाली क्रिप्टोकरेंसी या गेमिंग एप्लीकेशन में ज्यादा रिटर्न से दूर रहें।

--आईएएनएस

डीके/वीसी