गुजरात में ‘विकास भी, विरासत भी’ का विजन हुआ साकार, पिछले एक दशक में बने 5 नए म्यूजियम
गांधीनगर, 8 जून (आईएएनएस)। गुजरात में पिछले दो वर्षों में कुल 16 लाख से अधिक आगंतुक अलग-अलग संग्रहालयों यानी म्यूजियम को देखने के लिए पहुंचे। गुजरात सरकार के युवा सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियां विभाग के अधीन कार्यरत पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय के निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने यह जानकारी दी और कहा कि बदलते समय के साथ डिजिटल टेक्नोलॉजी के समन्वय से म्यूजियम अब केवल कलाकृतियों के संग्रह स्थान नहीं, बल्कि संस्कृति के जीवंत केंद्र बन गए हैं।
गत 12 वर्षों में गुजरात में अनेक म्यूजियम बनाए गए हैं, जिनमें कच्छ के भूकंप का सामना करने वाले कच्छियों की जीवटता और जज्बे को दर्शाने वाला ‘स्मृतिवन’, गांधी विचार की विरासत को जीवंत करने वाला ‘दांडी कुटीर’ और प्रधानमंत्री की जन्मभूमि वडनगर की सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने वाला ‘वडनगर पुरातत्व अनुभवात्मक संग्रहालय’ शामिल है।
समय के अनुरूप संग्रहालयों का स्वरूप भी बदला है। आज, गुजरात के संग्रहालय केवल कलाकृति के संग्रह स्थान ही नहीं रहे, वे इंटरैक्टिव और डिजिटल लर्निंग के वैश्विक केंद्र बन गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्षों के दौरान, गुजरात सरकार ने देश में ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र को चरितार्थ किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में गुजरात ने आर्थिक विकास के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करके नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन विरासत से वाकिफ कराया है।
अतीत में म्यूजियम को केवल कांच के शो-केस में रखी पुरानी मूर्तियां या सिक्के देखने का स्थान माना जाता था। लेकिन गत 12 वर्षों में गुजरात सरकार ने इस परिभाषा को बदल दिया है। आज राज्य के संग्रहालयों में एआर और वीआर (ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी), 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राम और इंटरेक्टिव टच स्क्रीन जैसी अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी विरासत को केवल देखे ही नहीं, बल्कि अनुभव भी कर सके।
स्मृतिवन भूकंप स्मारक और म्यूजियम (भुज) : 2001 में आए विनाशकारी भूकंप में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में बना यह म्यूजियम भारत का सबसे आधुनिक टेक्नोलॉजी वाला म्यूजियम है, जहां आगंतुक सिम्युलेटर के जरिए भूकंप का जीवंत अनुभव कर सकते हैं।
भुज के भुजिया डुंगर (पहाड़ी) पर बना स्मृति वन भूकंप स्मारक और म्यूजियम आज केवल गुजरात या भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बन गया है। स्मृतिवन पहुंचे आगंतुकों ने इस म्यूजियम को प्राकृतिक आपदा के खिलाफ जीवटता से दोबारा खड़े होने की गुजरात की जज्बे का प्रतीक बताया है।
म्यूजियम के अंदर बनाए गए थियेटर और डिजिटल माध्यमों के बारे में बात करते हुए पर्यटकों ने बताया कि यहां आकर 2001 के उस भयानक भूकंप का वास्तविक अनुभव होता है। भूकंप के दौरान लोगों पर क्या बीती होगी और उसके बाद कैसे पूरा गुजरात इस विभीषिका से उबरकर खड़ा हुआ दोबारा पटरी पर लौटा, इसकी प्रेरक गाथा आगंतुकों की आंखें नम कर देती है।
गांधीनगर में वर्ष 2015 में बना दांडी कुटीर म्यूजियम महात्मा गांधी के जीवन और विचारों को आधुनिक तकनीक के जरिए लोगों तक पहुंचाता है। यह 41 मीटर ऊंचा शंकु आकार का गुंबद है, जो नमक के ढेर का प्रतीक है। दांडी कुटीर वर्ष 1930 में महात्मा गांधी जी द्वारा किए गए नमक सत्याग्रह का प्रतीक है।
दांडी कुटीर में प्रकाश, ध्वनि, एनिमेशन और मल्टीमीडिया प्रेजेंटेशन के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन की गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। दांडी कुटीर ने साबित किया है कि म्यूजियम केवल प्रदर्शन का केंद्र नहीं, बल्कि प्रेरणा का माध्यम भी बन सकता है।
वर्ष 2025 में निर्मित यह म्यूजियम वडनगर के हजारों वर्ष प्राचीन इतिहास और उत्खनन के दौरान मिले पुरातात्विक अवशेषों को जीवंत रखने के लिए बनाया गया है। यह भारत में अपनी तरह का पहला म्यूजियम है, जो उत्खनन स्थल के अनुभव और उत्खनन के दौरान मिले अवशेषों को प्रदर्शित करता है।
इस अत्याधुनिक पुरातात्विक म्यूजियम में ऑगमेंटेड रियलिटी-वर्चुअल रियलिटी, 3डी डिस्प्ले, प्रतिकृति और डायोरामा जैसी इमर्सिव टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है। यह स्थल आंतरिक अवलोकन के जरिए 2500 वर्षों के सात सांस्कृतिक चरणों के कालक्रमिक विकास का अद्वितीय अनुभव और समझ देता है।
भारत की प्राचीन समुद्री शक्ति और सिंधु घाटी सभ्यता की विरासत को उजागर करने वाले इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है। लोथल में निर्माणाधीन राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर दुनिया का सबसे बड़ा मैरीटाइम म्यूजियम होगा। दुनिया की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यताओं में से एक सिंधु घाटी सभ्यता के एक अहम बंदरगाह शहर के रूप में जाना जाने वाला लोथल आज एक बार फिर वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन रहा है। लोथल समुद्री विरासत परिसर केवल एक म्यूजियम नहीं, बल्कि भारत के समृद्ध समुद्री इतिहास और वैश्विक व्यापार परंपरा को दुनिया के समक्ष पेश करने वाला एक भव्य सांस्कृतिक केंद्र होगा।
जहां परंपरागत म्यूजियमों में केवल वस्तुओं का प्रदर्शन किया जाता है, वहीं लोथल में आगंतुकों को हजारों वर्ष प्राचीन बंदरगाह शहर की जीवंत अनुभूति कराने का प्रयास किया जा रहा है। अत्याधुनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी, इमर्सिव गैलरियां, वर्चुअल प्रेजेंटेशन, समुद्री व्यापार के मॉडल और इंटरैक्टिव प्रदर्शनी के जरिए आगंतुक प्राचीन भारत के वैश्विक व्यापार और नौकायन कौशल को निकट से देख और समझ पाएंगे।
दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के साथ सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और तत्कालीन भारत की रियासतों के विलय के इतिहास को दिखाने वाला यह अत्याधुनिक म्यूजियम ‘विकास भी, विरासत भी’ के विजन का शानदार उदाहरण है।
गुजरात सरकार आने वाले समय में भी राज्य की अस्मिता, संस्कृति और इतिहास को वैश्विक फलक पर ले जाने तथा नई पीढ़ी में अपनी भव्य विरासत के प्रति गौरव का भाव पैदा करने के लिए ऐसे ही आधुनिक प्रकल्पों का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है।
--आईएएनएस
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