गृह मंत्री ने अवैध कोयला खनन और चोरी की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई
नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह एवं कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अवैध कोयला खनन और कोयले की चोरी से जुड़ी स्थिति की समीक्षा के लिए नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में, केंद्रीय गृह सचिव, केंद्रीय कोयला सचिव और कोयला मंत्रालय, सीआईएसएफ, कोल इंडिया लिमिटेड तथा बीसीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक के दौरान, गृह मंत्री ने धनबाद और आस-पास के इलाकों में अवैध कोयला खनन और चोरी की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई। कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठक में गृह मंत्री को बताया कि अक्टूबर 2025 के पहले हफ्ते में हुई समीक्षा के बाद से कई ठोस कदम उठाए गए हैं। यह भी बताया गया कि सीआईएसएफ और कोल इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों को ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957’ के तहत कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। यह अधिकार उन्हें कोर्ट में केस करने, ऐसी जगहों पर जाने जहां अवैध कोयला होने का शक हो, तलाशी और जब्ती की कार्रवाई करने, और अवैध रूप से निकाले गए खनिजों के साथ-साथ ऐसी गैर-कानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किए गए औजारों, उपकरणों और गाड़ियों को जब्त करने की इजाजत देता है। यह भी बताया गया कि केंद्रीय गृह सचिव ने दिसंबर 2025 में एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी जिसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। इनमें 'कोयला क्षेत्र समन्वय समिति' के गठन का निर्णय भी शामिल था और इस समिति का गठन कर दिया गया है।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कोयला मंत्रालय और सीआईएसएफ द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की सराहना की। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अवैध खनन की समस्या को रोकने के लिए अभी और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। गृह मंत्री ने अवैध खनन और कोयले के अनधिकृत परिवहन पर व्यापक और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए 'जीरो कोल लीकेज प्लान' सुनिश्चित सहित कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भले ही एमएमडीआर एक्ट के तहत सीआईएसएफ और कोल इंडिया लिमिटेड के अधिकारियों को अधिकार दिए गए हैं, लेकिन इन अधिकारों का इस्तेमाल सख्ती से और आपसी तालमेल के साथ, मंजूर किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के मुताबिक किया जाना चाहिए।
अमित शाह ने कोयला मंत्रालय को कार्रवाई की नियमित रूप से समीक्षा करने का भी निर्देश दिया। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उपभोक्ता केवल कानूनी रूप से खनन किए गए कोयले का ही इस्तेमाल करें और अवैध कोयले के परिवहन को रोका जा सके, जीएसटी अधिकारियों को इसमें शामिल करना जरूरी है। इसलिए, ट्रांसपोर्ट किए जा रहे सभी कोयले के लिए ई-वे बिल की जांच करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे सीआईएसएफ की तैनाती के लिए प्राथमिकता वाली सूची में कोयला क्षेत्र को शामिल करें, ताकि संवेदनशील इलाकों में तुरंत जवानों को तैनात किया जा सके। उन्होंने सीआईएसएफ को 'क्विक रिस्पॉन्स टीमें' बनाने और संवेदनशील इलाकों में कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का भी निर्देश दिया, ताकि जानकारी मिलने पर अवैध खनन करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सके।
गृह मंत्री ने टेक्नोलॉजी का ज्यादा असरदार ढंग से इस्तेमाल करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि अवैध खनन गतिविधियों में शामिल इलाकों और लोगों की पहचान करने के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स में लगे हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों का इस्तेमाल किया जाए। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और वैध कोयला खनन कार्यों के हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के लिए कटिबद्ध है।
--आईएएनएस
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