इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक विज्ञापनों को लेकर सरकार सख्त, Meta को भेजेगी समन; दो मिनट की वीडियो में जाने बच्चों की सुरक्षा पर मांगा जाएगा जवाब
इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी कथित आपत्तिजनक सामग्री और उससे संबंधित विज्ञापनों के प्रसारण के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) अब इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी Meta को समन भेजने की तैयारी कर रहा है। सरकार कंपनी से यह स्पष्ट करने को कहेगी कि ऐसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई दिए और उन्हें रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय Meta से बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी उसकी नीतियों, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया के बारे में भी विस्तृत जानकारी मांगेगा। साथ ही यह भी पूछा जाएगा कि भविष्य में बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse Material - CSAM) से संबंधित किसी भी प्रकार की सामग्री या विज्ञापन को रोकने के लिए कंपनी ने क्या सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।
आईटी मंत्री बोले- बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी प्रकार की अवैध या आपत्तिजनक सामग्री को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए प्रभावी और मजबूत तंत्र विकसित करें।मंत्री ने संकेत दिया कि यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो सरकार आवश्यक नियामकीय और कानूनी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
BBC की रिपोर्ट के बाद बढ़ी हलचल
यह मामला BBC की एक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद चर्चा में आया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री (CSAM) से जुड़े विज्ञापन और कंटेंट मौजूद थे। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि भारत में इंस्टाग्राम पर कुछ पेड विज्ञापनों में 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था।हालांकि, इन दावों पर Meta की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यह स्पष्ट नहीं है कि कथित विज्ञापन कंपनी की विज्ञापन प्रणाली से कैसे गुजर गए या उन्हें किस स्तर पर स्वीकृति मिली।
कंटेंट मॉडरेशन पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि करोड़ों उपयोगकर्ताओं वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अवैध सामग्री की पहचान और उसे समय रहते हटाना बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा हो।सरकार अब Meta से यह भी जानना चाहती है कि उसकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मानव समीक्षा टीम और अन्य निगरानी तंत्र इस तरह के विज्ञापनों और सामग्री का पता लगाने तथा उन्हें हटाने के लिए किस प्रकार काम करते हैं।
सरकार की नजर आगे की कार्रवाई पर
केंद्र सरकार का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। मंत्रालय द्वारा समन जारी होने के बाद Meta को विस्तृत जवाब देना होगा। इसके आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है।यह मामला डिजिटल सुरक्षा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और ऑनलाइन बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में Meta की प्रतिक्रिया और सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।