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कर विभाग और उद्योग अब टकराव की बजाय साझेदारी और सहयोगपूर्ण संबंध बनाने पर दे रहे जोर: राजस्व सचिव

 

नई दिल्ली, 26 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने गुरुवार को कहा कि राजस्व विभाग और उद्योगों के बीच संबंध अब धीरे-धीरे बदल रहे हैं और इसमें अब टकराव की बजाय साझेदारी, सहयोग और समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।

सीमा शुल्क सुधार-2026 पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने, एमएसएमई और उद्योगों को समर्थन देने पर बढ़ते फोकस को देखते हुए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सक्रिय रूप से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक तेजी और निश्चितता के साथ पहुंच प्रदान करने के लिए बनाया जाना चाहिए।

बजट में सीमा शुल्क सुधारों के दो मुख्य आधार 'पक्षकारों में विश्वास' और 'टेक्नोलॉजी के उपयोग' के बारे में बताते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि सीमा शुल्क विभाग मानव संसाधन और प्रौद्योगिकी दोनों क्षेत्रों में प्रणालियों के निर्माण और क्षमताओं को बढ़ाने के लिए प्रयास करेगा।

उन्होंने कहा कि भारत आज अपनी आर्थिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। बढ़ते व्यापार, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहन एकीकरण, विकसित होते डिजिटल वाणिज्य पारिस्थितिकी तंत्र और नागरिकों की बढ़ती आकांक्षाओं के लिए कुशल, पारदर्शी और उत्तरदायी शासन प्रणालियों की आवश्यकता है।

राजस्व सचिव ने कहा,"निर्यात के अवसरों पर ध्यान देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत विनिर्माण को बढ़ावा देने और लघु एवं मध्यम उद्यमों, डिजिटल उद्यमियों और स्टार्टअप्स को समर्थन देने का प्रयास कर रहा है, ऐसे में सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को निर्यातकों को तेजी और निश्चितता के साथ वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करने में सक्रिय रूप से सक्षम बनाना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि सीमा शुल्क प्रशासन केवल एक नियामक प्राधिकरण नहीं है, बल्कि एक ऐसी संस्था भी है जो आर्थिक विकास को सक्षम बनाती है, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करती है, समाज की रक्षा करती है और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाती है।

आयकर विभाग द्वारा पक्षकारों से परामर्श हेतु नए आयकर अधिनियम, 2025 के नियमों के मसौदे को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू करने पर टिप्पणी करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि यह खुले विचारों का संकेत है और दर्शाता है कि हम सभी के हित में सुझावों को सुनने और उन्हें शामिल करने के लिए तत्पर हैं।

उन्होंने कहा, "यह दृष्टिकोण केवल हमारी प्रणालियों में सुधार करने तक सीमित नहीं है। यह प्राधिकरण, कर विभाग और उद्योग जगत जैसे हितधारकों के बीच संबंधों को पुनर्परिभाषित करने के बारे में भी है।"

नया आयकर अधिनियम, आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेगा और 1 अप्रैल से लागू होगा।

--आईएएनएस

एबीएस/