E20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर सरकार का जवाब, वीडियो में कहा- एथेनॉल में नहीं होती चीनी, इंजन खराब होने की कोई शिकायत नहीं
पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय ने मंगलवार को आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक है और इसकी नियमित निगरानी की जाती है। सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
वायरल वीडियो पर मंत्रालय की सफाई
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें एक वाहन के फ्यूल टैंक के पास बड़ी संख्या में चींटियां दिखाई दे रही थीं। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा था कि पेट्रोल में मिलाए जा रहे एथेनॉल के कारण ऐसा हो रहा है। इस पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईंधन ग्रेड एथेनॉल में किसी प्रकार की शर्करा (चीनी) नहीं होती, इसलिए चींटियों के आकर्षित होने का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।
पुराने वीडियो और तस्वीरों से फैलाया जा रहा भ्रम
मंत्रालय के अनुसार, कुछ लोग पुराने वीडियो और तस्वीरों को दोबारा सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिससे आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। अधिकारियों ने कहा कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन से जुड़े सभी पहलुओं की विशेषज्ञों द्वारा लगातार समीक्षा की जाती है और इसकी गुणवत्ता तय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाती है।
E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने की नहीं मिली कोई रिपोर्ट
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के उपयोग के बाद इंजन खराब होने की कोई आधिकारिक शिकायत या रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। मंत्रालय का कहना है कि ऑटोमोबाइल कंपनियां और संबंधित एजेंसियां भी इस ईंधन के प्रदर्शन पर नजर रख रही हैं।
क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरणीय प्रदूषण घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानती है।
लोगों से अफवाहों से बचने की अपील
पेट्रोलियम मंत्रालय ने नागरिकों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अपुष्ट जानकारियों पर विश्वास न करने की सलाह दी है। मंत्रालय का कहना है कि ईंधन से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों और सरकारी घोषणाओं पर भरोसा किया जाना चाहिए।