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विशाखापत्तनम में 1.30 लाख करोड़ का Google AI हब, 586 एकड़ जमीन पर बनेंगे 3 डेटा सेंटर कैंपस; जंगल कटाई के आरोपों से विवाद

 

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में गूगल का बड़ा डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब विकसित किया जा रहा है। करीब 15 अरब डॉलर यानी लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत तीन डेटा सेंटर कैंपस बनाए जाने की योजना है। राज्य सरकार ने इसके लिए तीन गांवों में कुल 586 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है। अदाविवरम-मुदासरलोवा गांव में निर्माण से जुड़ा काम शुरू होने की जानकारी है। हालांकि, परियोजना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरणविदों की चिंताएं भी सामने आई हैं।आरोप हैं कि परियोजना के लिए करीब 160 एकड़ क्षेत्र में जंगल काटे जा रहे हैं और जमीन समतल करने के लिए पहाड़ी को काटा जा रहा है। पर्यावरणविदों ने वन्यजीव अभयारण्य और जलाशय के नजदीक निर्माण होने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐसे बड़े निर्माण का आसपास के प्राकृतिक पर्यावरण और जल संसाधनों पर संभावित असर समझना जरूरी है।

ग्रामीणों ने जमीन अधिग्रहण पर उठाए सवाल

परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन आजीविका का प्रमुख आधार रही है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि जमीन को लेकर पहले जो भरोसा दिलाया गया था, अब परिस्थितियां उससे अलग दिखाई दे रही हैं।तरलुवाड़ा की पूर्व सरपंच पायला कोंडम्मा के मुताबिक, सर्वे के समय अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि जमीन ग्रामीणों के पास ही रहेगी। वहीं, किसान अप्पलाराजू ने आरोप लगाया कि कई साल पहले आवंटित की गई जमीन अब उनसे ली जा रही है।ग्रामीणों की इन शिकायतों के बीच जमीन के इस्तेमाल, अधिग्रहण की प्रक्रिया और प्रभावित परिवारों के हितों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जमीन से संबंधित दावों और अधिकारियों की ओर से दिए गए आश्वासनों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और सरकारी पक्ष की जानकारी जरूरी है।

15 अरब डॉलर का AI हब क्यों है अहम?

विशाखापत्तनम में प्रस्तावित यह परियोजना भारत में डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार से जुड़ी है। इसके तहत बड़े डेटा सेंटर कैंपस विकसित किए जाने हैं, जहां डिजिटल सेवाओं और AI से संबंधित कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए जरूरी क्षमता उपलब्ध कराई जा सकती है।परियोजना में अंतरराष्ट्रीय समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली इंटरनेट केबलों का नेटवर्क भी शामिल बताया गया है। ऐसी केबलें देशों और महाद्वीपों के बीच डेटा के तेज और बड़े पैमाने पर आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।यदि परियोजना निर्धारित योजना के मुताबिक विकसित होती है, तो विशाखापत्तनम की डिजिटल बुनियादी ढांचे में भूमिका बढ़ सकती है। हालांकि, इसके आर्थिक लाभ, रोजगार सृजन और स्थानीय समुदायों को मिलने वाले फायदे का वास्तविक आकलन परियोजना की प्रगति और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

अप्रैल 2026 में शुरू हुआ निर्माण

दी गई जानकारी के मुताबिक, परियोजना का निर्माण अप्रैल 2026 में शुरू हुआ था। कंपनी की योजना के अनुसार, डेटा सेंटर परियोजना 2028 में चालू हो सकती है। तीन कैंपस और संबंधित डिजिटल नेटवर्क का विकास इस बड़े निवेश का हिस्सा है।हालांकि, इतनी बड़ी परियोजना में निर्माण के साथ बिजली, पानी, जमीन और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण होगा। डेटा सेंटर को संचालन के लिए पर्याप्त बिजली और शीतलन व्यवस्था की जरूरत होती है, इसलिए संसाधनों की उपलब्धता और उनके इस्तेमाल पर भी ध्यान देना होगा।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती

गूगल का प्रस्तावित AI हब डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है, लेकिन जंगल कटाई, पहाड़ी की खुदाई और जलाशय के नजदीक निर्माण से जुड़े आरोपों ने पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ा दी हैं।अब परियोजना को लेकर यह देखना अहम होगा कि पर्यावरणीय नियमों का पालन कैसे किया जा रहा है, ग्रामीणों की जमीन संबंधी शिकायतों का समाधान किस तरह होता है और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। परियोजना की प्रगति के साथ सरकारी दस्तावेजों, पर्यावरणीय मंजूरियों और कंपनी के आधिकारिक पक्ष से इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।