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व्यापारियों और कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज! GST नियमों में बड़ा बदलाव, इंश्योरेंस और नोटिस पर मिला बड़ा फायदा

 

57वीं GST काउंसिल की बैठक में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की खबर है। सूत्रों के मुताबिक, काउंसिल ने GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति में बदलाव, कई कारोबारी खर्चों पर Input Tax Credit (ITC) का लाभ देने और छोटे टैक्स विवादों को कम करने जैसे कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है।इसके अलावा डिलीवरी सर्विस, रिट्रेडेड ट्रैक्टर टायर, टेलीकॉम टावर, आउटडोर कैटरिंग और FMCG-फार्मा सेक्टर से जुड़े टैक्स नियमों में भी बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इन फैसलों से कई कारोबारों की लागत कम होने और टैक्स से जुड़े विवादों में राहत मिलने की उम्मीद है।

GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति में बड़ा बदलाव

सूत्रों के मुताबिक, GST काउंसिल ने CGST एक्ट की धारा 69 के तहत गिरफ्तारी के प्रावधान में बदलाव को मंजूरी दी है।इसके बाद सामान्य GST विवादों में टैक्स अधिकारी सीधे गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं कर सकेंगे। गंभीर आपराधिक मामलों और जानबूझकर टैक्स चोरी जैसे मामलों में कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाएगा।इस बदलाव से कारोबारियों को सामान्य टैक्स विवादों में गिरफ्तारी के डर से राहत मिलने की उम्मीद है।

कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर ITC

कंपनियों के लिए एक और बड़ा फैसला कर्मचारियों के ग्रुप हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ा है।सूत्रों के मुताबिक, कंपनियों को कर्मचारियों के लिए लिए गए पात्र ग्रुप इंश्योरेंस पर भुगतान किए गए GST का ITC लेने की अनुमति दी गई है। इससे कंपनियों की प्रभावी लागत कम हो सकती है और कर्मचारियों को दिए जाने वाले इंश्योरेंस बेनिफिट पर टैक्स का बोझ घट सकता है।

टेलीकॉम टावर और फैक्ट्री के बाहर की पाइपलाइन पर ITC

GST काउंसिल ने टेलीकॉम टावर और फैक्ट्री परिसर के बाहर लगी कुछ पाइपलाइनों पर भी ITC का रास्ता साफ करने को मंजूरी दी है।इसका फायदा टेलीकॉम, पेट्रोकेमिकल, रिफाइनिंग, गैस डिस्ट्रीब्यूशन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कारोबारों को मिल सकता है। इन सेक्टर में टावर, पाइपलाइन और दूसरे बड़े एसेट्स पर कंपनियां भारी पूंजीगत खर्च करती हैं।

डिलीवरी सर्विस पर GST 18% से घटकर 5%

डिलीवरी सेक्टर के लिए भी राहत की खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, अनरजिस्टर्ड डिलीवरी सर्विस देने वाले राइडर्स की सेवाओं पर GST को 18% से घटाकर 5% करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।इससे छोटे डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स से जुड़े डिलीवरी कारोबार पर टैक्स का बोझ कम होने की उम्मीद है।

आउटडोर कैटरिंग पर भी ITC का फायदा

कंपनियों को आउटडोर कैटरिंग से जुड़े खर्चों पर भी राहत मिलने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, पात्र कारोबारियों को आउटडोर कैटरिंग पर भुगतान किए गए GST का ITC लेने की अनुमति देने को मंजूरी दी गई है।इससे कंपनियों के लिए बिजनेस इवेंट्स और अन्य आउटडोर कैटरिंग से जुड़े खर्च की प्रभावी लागत कम हो सकती है।

रिट्रेडेड ट्रैक्टर टायर पर GST अब 5%

कृषि क्षेत्र से जुड़े कारोबार के लिए भी बड़ा फैसला किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, रिट्रेडेड ट्रैक्टर टायर पर GST 18% से घटाकर 5% करने को मंजूरी दी गई है।रिट्रेडिंग प्रक्रिया में पुराने टायरों को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जाता है। GST में यह कमी किसानों और कृषि से जुड़े कारोबारों की लागत कम करने में मदद कर सकती है।

FMCG और फार्मा कंपनियों को ITC में राहत

GST काउंसिल ने फ्री सैंपल और कानून के तहत अनिवार्य रूप से नष्ट किए जाने वाले सामान पर भी ITC से जुड़े नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है।सूत्रों के मुताबिक, पात्र परिस्थितियों में कंपनियों को ऐसे फ्री सैंपल पर चुकाए गए GST का ITC मिल सकेगा। इसी तरह एक्सपायर होने के बाद कानून के तहत नष्ट किए जाने वाले सामान को लेकर भी ITC का रास्ता साफ किया गया है।इसका फायदा खास तौर पर FMCG और फार्मास्युटिकल कंपनियों को मिल सकता है। फार्मा कंपनियों के लिए एक्सपायर दवाओं और सैंपल को नष्ट करना कारोबार की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

10 हजार रुपये से कम की टैक्स डिमांड पर शो-कॉज नोटिस नहीं?

छोटे टैक्स विवादों को कम करने के लिए भी अहम फैसला सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, GST काउंसिल ने 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा तय करने को मंजूरी दी है।इसके तहत 10,000 रुपये से कम की टैक्स डिमांड वाले मामलों में शो-कॉज नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।इसका उद्देश्य छोटी रकम वाले मामलों में कारोबारियों और टैक्स विभाग की अनावश्यक प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई को कम करना है। इससे GST विभाग का समय और संसाधन बड़े और गंभीर मामलों पर लगाने में मदद मिल सकती है।

कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा?

57वीं GST काउंसिल के इन प्रस्तावित बदलावों का असर कई सेक्टर पर पड़ सकता है। FMCG, फार्मा, टेलीकॉम, इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-कॉमर्स, डिलीवरी और कॉरपोरेट सेक्टर को अलग-अलग फैसलों से राहत मिलने की उम्मीद है।हालांकि, इन फैसलों का वास्तविक असर संबंधित अधिसूचनाओं और नियमों के लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक, सरकार का फोकस टैक्स सिस्टम को आसान बनाने, छोटे विवादों को कम करने और कारोबार की लागत घटाने पर दिखाई दे रहा है।