गोवा का ऐतिहासिक महालक्ष्मी मंदिर: जहां एक नहीं, बल्कि मां की दो मूर्तियां विराजमान हैं
गोवा, 2 नवंबर (आईएएनएस)। भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनका इतिहास सदियों पुराना है और जिनसे जुड़ी कहानियां आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। ऐसा ही एक मंदिर गोवा के पोंडा के पास बंदोरा (बांदोडे) में स्थित मां महालक्ष्मी का मंदिर है। यह मंदिर अपनी खूबसूरत बनावट, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, लेकिन इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां मां महालक्ष्मी की एक नहीं, बल्कि दो मूर्तियां विराजमान हैं। इसके पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है।
महालक्ष्मी देवी मंदिर का इतिहास 1413 से जुड़ा बताया जाता है। हालांकि, गोवा में पुर्तगालियों के शासन के दौरान 16वीं शताब्दी में कई हिंदू मंदिरों पर संकट आ गया था। उस दौर में मंदिरों को तोड़े जाने और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाए जाने का खतरा बढ़ गया था। ऐसे में दक्षिण गोवा के साल्सेट इलाके के कोल्वा में स्थित मां महालक्ष्मी के मंदिर से देवी की मूर्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का फैसला किया गया।
कहते हैं कि मां की मूर्ति को बचाने की जिम्मेदारी साफ्टो और फातो नाम के दो निष्ठावान भक्तों ने उठाई थी। दोनों भक्तों ने अपनी जान की परवाह किए बिना रात के अंधेरे में देवी की मूर्ति को एक बड़े बक्से में छिपाया और वहां से लेकर निकल पड़े। दोनों भक्त मां की मूर्ति को लेकर पोंडा के पास स्थित तालाउली गांव पहुंचे। कहा जाता है कि जिस स्थान पर देवी की मूर्ति को कुछ समय के लिए रखा गया था, वहां मां के चरण-चिह्न मौजूद हैं। गांव के लोग आज भी इन चरण-चिह्नों को श्रद्धा के साथ पूजते हैं।
बाद में कोल्वा से लाई गई मां की मूर्ति को बंदोरा में स्थापित कर दिया गया। खास बात यह थी कि यहां पहले से ही मां महालक्ष्मी की एक दूसरी मूर्ति विराजमान थी। इस तरह मंदिर में देवी की दो मूर्तियां एक साथ स्थापित हो गईं। यही वजह है कि यह मंदिर दूसरे मंदिरों से थोड़ा अलग और खास माना जाता है।
मंदिर में प्रवेश करते ही इसकी पारंपरिक वास्तुकला और खूबसूरती ध्यान खींचती है। मंदिर का प्रवेश द्वार आकर्षक तोरण और हाथियों की मूर्तियों से सजाया गया है। अंदर की छत पर पुराने जमाने के खूबसूरत झूमर लगे हैं। वहीं, दीवारों पर भगवान गणेश, हनुमान और गरुड़ की सुंदर नक्काशी देखने को मिलती है। मंदिर की भीतरी दीवारों पर पुराणों से जुड़ी कथाओं को चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है।
यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का स्थान नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और साहस की एक अनोखी कहानी भी समेटे हुए है। यहां मां की दो मूर्तियों के दर्शन के साथ भक्त उन दो निष्ठावान लोगों के बलिदान और श्रद्धा को भी याद करते हैं, जिन्होंने देवी की प्रतिमा को सुरक्षित रखने का बीड़ा उठाया था।
--आईएएनएस
पीआईएम/डीकेपी