ग्लोबल साउथ को अब नियम मानने नहीं, नियम बनाने होंगे: विक्रम मिस्री
न्यूयॉर्क, 26 सितंबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत ने एक बार फिर ग्लोबल साउथ के हितों को मजबूती से रखा है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने न्यूयॉर्क में 'ग्रुप ऑफ 77' के विदेश मंत्रियों की 50वीं सालाना बैठक में भारत का पक्ष रखा।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक 'एक्स' अकाउंट पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा गया, "विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री ने न्यूयॉर्क में यूएनजीए81 के दौरान 'ग्रुप ऑफ 77' के विदेश मंत्रियों की 50वीं सालाना बैठक में भारत का राष्ट्रीय बयान दिया। इस बैठक का विषय 'ग्लोबल साउथ और मल्टीलेटरलिज्म का भविष्य' था।"
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भी इस बैठक की जानकारी साझा की। अपने पोस्ट में मिशन ने बताया कि विदेश सचिव ने लोगों पर केंद्रित और विकास-उन्मुख बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने में जी77 की लगातार अहमियत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में जी77 जैसे मंच की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है, क्योंकि यही मंच विकासशील देशों की आवाज को एकजुट करता है। मिस्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल जरूरत को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब तक यूएनएससी में विकासशील देशों की आवाज और प्रतिनिधित्व मजबूत नहीं होगा, तब तक सच्चा बहुपक्षवाद संभव नहीं है।
अपने बयान में विदेश सचिव ने एक बड़ा आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को अब 'नियम मानने वालों' से 'नियम बनाने वालों' की भूमिका में आना होगा। इसके लिए सभी विकासशील देशों को सामूहिक प्रयास करने होंगे।
एक अन्य कार्यक्रम में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने संयुक्त राष्ट्र की डिप्टी सेक्रेटरी-जनरल अमीना जे. मोहम्मद से भी मुलाकात की। इस मुलाकात में एआई और सतत विकास में उभरते अवसरों पर चर्चा हुई।
विदेश सचिव ने इस दौरान डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) में भारत के योगदान पर जोर दिया और बताया कि भारत किस तरह सतत विकास के लिए समावेशी, सुलभ और मानव केंद्रित एआई टेक्नोलॉजी विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने यूएन के तंत्रों, जिसमें कंट्री टीमें भी शामिल हैं, को और अधिक प्रभावी और कुशल बनाने की जरूरत पर भी बल दिया, ताकि जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को तेजी से लागू किया जा सके।
--आईएएनएस
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