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जिम्स कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर भाकियू का प्रदर्शन, डायरेक्टर पर लगाए आरोप; जांच और रिहाई की मांग

 

ग्रेटर नोएडा, 29 जून (आईएएनएस)। ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में धरनारत कर्मचारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में सोमवार को भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने जिला मुख्यालय सूरजपुर पर धरना-प्रदर्शन किया। संगठन ने जिम्स के डायरेक्टर पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी उच्चस्तरीय जांच कराने और गिरफ्तार कर्मचारियों की तत्काल रिहाई की मांग की।

इस संबंध में जिलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन एडीएम मंगलेश दुबे को सौंपा गया। भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि गिरफ्तार कर्मचारियों को जल्द रिहा नहीं किया गया और उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन जनपद स्तर पर बड़ा आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के नेता रॉबिन नागर ने किया।

इस दौरान जिलाध्यक्ष राजीव मलिक ने आरोप लगाया कि पिछले दो से तीन वर्षों से गौतमबुद्ध नगर का पुलिस प्रशासन निरंकुश रवैया अपना रहा है। उन्होंने कहा कि जनपद में अपने अधिकारों की मांग करने वाले लोगों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

भाकियू के राष्ट्रीय महामंत्री एवं प्रवक्ता पवन खटाना ने कहा कि जिम्स अस्पताल के कर्मचारी पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप है कि रात के समय पुलिस ने धरनास्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों पर लाठीचार्ज किया और महिला कर्मचारियों समेत कई लोगों को बलपूर्वक हिरासत में ले लिया।

उन्होंने दावा किया कि गिरफ्तार कर्मचारियों को कहां ले जाया गया, इसकी जानकारी भी परिजनों और अन्य कर्मचारियों को तत्काल उपलब्ध नहीं कराई गई, जो गंभीर चिंता का विषय है। भारतीय किसान यूनियन ने ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं। संगठन ने सभी गिरफ्तार कर्मचारियों की बिना शर्त तत्काल रिहाई, कर्मचारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने, उनकी लंबित एवं जायज मांगों का शीघ्र समाधान करने तथा जिम्स के डायरेक्टर ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता पर लगे अनियमितताओं और धांधली के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

संगठन ने आरोप लगाया कि संस्थान में उत्पन्न पूरे विवाद की जड़ डायरेक्टर हैं और उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। (इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया आना शेष है।) भाकियू नेताओं ने कहा कि पुलिस की कथित सख्ती और कर्मचारियों के साथ किए गए व्यवहार से कर्मचारियों तथा आम लोगों में आक्रोश है।

उन्होंने प्रशासन से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने और कर्मचारियों को न्याय दिलाने की अपील की। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी दिनों में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।

--आईएएनएस

पीकेटी/डीकेपी