×

जर्मनी की 33 डिग्री गर्मी ने छुड़ा दिए पसीने! इंडियन महिला बोली- यूपी के 45°C से भी ज्यादा मुश्किल है यहां का मौसम

 

अभी यूरोप में ज़बरदस्त गर्मी की लहर (हीट वेव) चल रही है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन और यूके जैसे कई देशों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच, जर्मनी में रहने वाली एक भारतीय महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में वह बताती हैं कि उत्तर प्रदेश में 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान झेलने के बावजूद, जर्मनी की 33 डिग्री गर्मी उन्हें ज़्यादा परेशान कर रही है।

An Indian girl speaks about the heatwave in Germany. pic.twitter.com/KxhSwbbG67

— कलयुगी भीष्म (@ChadBhishm) June 28, 2026


जिम से घर लौटते समय रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में महिला कहती हैं, "मैं जर्मनी में रहती हूँ और यहाँ अभी तापमान 33 डिग्री है। मैं भारत में यूपी में रह चुकी हूँ, जहाँ तापमान अक्सर 45 से 50 डिग्री तक पहुँच जाता है। वहाँ इतनी मुश्किल नहीं होती थी, लेकिन यहाँ की गर्मी बिल्कुल बर्दाश्त से बाहर है।" उनके अनुसार, तेज़ धूप और लगातार गर्मी ने लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी बदल दी है। उन्होंने बताया कि 33 डिग्री तापमान पर भी हीट वॉर्निंग जारी की गई है और ज़्यादातर लोग घरों के अंदर ही रहने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका जिम, जो आमतौर पर भरा रहता है, गर्मी की वजह से लगभग खाली था।

यूरोप में 33 डिग्री सेल्सियस तापमान, उत्तर प्रदेश के 45 डिग्री सेल्सियस तापमान से ज़्यादा तेज़ क्यों लगता है?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका मुख्य कारण यह है कि यूरोप में ज़्यादातर घर, ऑफिस और सार्वजनिक इमारतें ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। वहाँ एयर कंडीशनर का इस्तेमाल भारत की तरह आम नहीं है। नतीजतन, जितनी गर्मी बाहर होती है, उतनी ही अंदर भी बनी रहती है। एक और कारण है लंबे दिन; गर्मियों में यूरोप में सूरज 15 से 16 घंटे तक निकला रहता है। लंबे समय तक धूप रहने से इमारतें और सड़कें काफी देर तक गर्म रहती हैं, जिससे रात में तापमान आसानी से कम नहीं हो पाता।

तीसरा कारण यह है कि यूरोप के लोग ऐसी गर्मी के आदी नहीं हैं। भारत में कई इलाकों में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तापमान सामान्य माना जाता है और लोगों ने अपने घरों, कपड़ों और रोज़मर्रा की आदतों को उसी हिसाब से ढाल लिया है। इसके उलट, यूरोप में 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान को असामान्य माना जाता है। साथ ही, वैज्ञानिकों का कहना है कि इस इलाके में अभी 'ओमेगा ब्लॉक' नाम का एक हाई-प्रेशर वेदर सिस्टम बना हुआ है। यह सिस्टम गर्म हवा को कई दिनों तक एक ही इलाके में रोककर रखता है, जिससे लगातार हीट वेव (लू) की स्थिति बनी रहती है। जलवायु परिवर्तन के कारण, यूरोप में ऐसी भीषण हीट वेव पहले की तुलना में ज़्यादा बार और ज़्यादा तेज़ी से आ रही हैं।