Gender Ratio: बेटी बचाओ अभियान से जन्म के अनुपात में सुधार, हर 1,000 लड़कों पर 930 लड़कियां; शिक्षा में अब भी अंतर
भारत में जन्म के समय लड़कियों और लड़कों के अनुपात में सुधार के संकेत मिले हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के शुरुआती जिलों में हुए बदलावों पर आधारित एक रिसर्च में अनुमान लगाया गया है कि हर 1,000 जन्म पर करीब 15 अतिरिक्त लड़कियों का जन्म हुआ। हालांकि, इस सुधार के बावजूद देश में लैंगिक असमानता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वहीं, उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के मामले में भी लड़कियां अब तक लड़कों से पीछे हैं।
जन्म के समय लिंग अनुपात में हुआ सुधार
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2015-16 में भारत में हर 1,000 लड़कों के जन्म पर 919 लड़कियों का जन्म दर्ज किया जाता था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 930 हो गया है। इसे जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, देश के 757 जिलों के आंकड़ों में केवल 26 जिलों में प्रति 1,000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 1,000 से अधिक दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय स्तर पर सुधार के बावजूद कई क्षेत्रों में लड़कियों के जन्म का अनुपात अभी भी चिंता का विषय है।
पहली संतान बेटी होने पर दिखा ज्यादा असर
‘पॉलिसी इंटरवेंशंस एंड द सेक्स रेशियो एट बर्थ: एविडेंस फ्रॉम इंडिया’ नाम की रिपोर्ट में परिवार की पहली संतान और उसके बाद जन्म लेने वाले बच्चों के लिंग अनुपात के बीच संबंध का अध्ययन किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरी और उसके बाद की संतानों में लड़की के जन्म की संभावना में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान सामने आया। जिन परिवारों की पहली संतान बेटी थी, उनमें दूसरी संतान भी बेटी होने की संभावना 3.7 से 5.3 प्रतिशत अंक तक बढ़ी।
इसका अर्थ है कि ऐसे परिवारों में हर 1,000 जन्म पर 37 से 53 अतिरिक्त लड़कियों के जन्म का अनुमान लगाया गया। इसके विपरीत, पहली संतान बेटा होने वाले परिवारों में इसी तरह का बदलाव दर्ज नहीं किया गया।
26 जिलों में लड़कियों का जन्म अनुपात लड़कों से ज्यादा
देश के 757 जिलों के आंकड़ों में 26 जिलों में जन्म के समय प्रति 1,000 लड़कों पर 1,000 से अधिक लड़कियां दर्ज की गईं। वहीं, 243 जिलों में यह अनुपात 950 से 1,000 के बीच रहा।
इन जिलों में रुद्रप्रयाग, कपूरथला, बारामूला, पुलवामा, उत्तरी गोवा, जैसलमेर और उडुपी के नाम शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गोवा, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल जन्म के समय लिंग अनुपात के मामले में बेहतर स्थिति वाले राज्यों में शामिल हैं।
शिक्षा में अब भी लड़कियों और लड़कों के बीच अंतर
जन्म के समय लिंग अनुपात में सुधार के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक अंतर बना हुआ है। यूनेस्को की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण भारत में 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने वाले हर 100 लड़कों के मुकाबले केवल 59 लड़कियां इस स्तर तक पहुंच पाती हैं।
हालांकि, उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के आंकड़ों में एक अलग तुलना के अनुसार, हर 100 लड़कों के मुकाबले 89 लड़कियां यह स्तर पूरा करती हैं। इन आंकड़ों के बीच अंतर का कारण अध्ययन की परिभाषा, नमूने या भौगोलिक दायरे में हो सकता है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही मापदंड मानने से पहले संबंधित रिपोर्टों के मूल विवरण की जांच जरूरी है।
बेटियों के जन्म के साथ शिक्षा पर भी ध्यान जरूरी
आंकड़े बताते हैं कि लड़कियों के जन्म को लेकर स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन यह बदलाव सभी जिलों में समान नहीं है। साथ ही, स्कूलों में लड़कियों की निरंतर भागीदारी और उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी करने की उनकी क्षमता भी महत्वपूर्ण है।
इसलिए लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति का आकलन केवल जन्म के अनुपात से नहीं, बल्कि शिक्षा तक पहुंच, पढ़ाई पूरी करने की दर और लड़कियों को मिलने वाले अवसरों के आधार पर भी किया जाना चाहिए।