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गर्व है कि हमने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है, यह एहसास अविश्वसनीय: तिलक वर्मा

 

निशिन, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम ने एशियन गेम्स 2026 में पाकिस्तान को फाइनल में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। खिताबी मुकाबले में टीम की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले तिलक वर्मा ने यह जीत देश और अपने माता-पिता को समर्पित की है।

तिलक ने कहा कि पोडियम पर तिरंगा थामना एक अनोखा एहसास है जो आईसीसी खिताब से बिल्कुल अलग है। भारत ने शनिवार को कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में हुए फाइनल में पाकिस्तान को 19 रन से हराकर एशियन गेम्स में पुरुषों का टी20 गोल्ड मेडल अपने नाम किया। तिलक ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "जाहिर है कि बहुत गर्व है कि हमने अपने देश के लिए एक और गोल्ड मेडल जीता है और अभी यह एहसास अविश्वसनीय लग रहा है। एशियन गेम्स कुछ अलग है - चैंपियंस ट्रॉफी या वर्ल्ड कप जैसे दूसरे टूर्नामेंट जीतना बिल्कुल अलग बात है।"

उन्होंने आगे कहा, "वहां हमें वर्ल्ड कप या कुछ और एहसास होगा। मगर झंडा थामने और गोल्ड मेडल पाने का यह एहसास बिल्कुल अलग है, जिसे हम शब्दों में बयां नहीं कर सकते। मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे यह दूसरी बार मिला है और मैं इसके लिए सच में शुक्रगुजार हूं।" भारत के जल्दी विकेट गिरने के बाद उन्होंने हाई-प्रेशर वाले फाइनल को कैसे संभाला, इस पर बात करते हुए वर्मा ने बताया कि कैसे शिवम दुबे (जिन्होंने अहम 27 रन बनाए) के साथ उनकी 62 रनों की जरूरी पार्टनरशिप ने भारतीय पारी को संभाला और टीम को 200 रनों के पार पहुंचाया।

उन्होंने कहा, "जाहिर है कि यह एक बड़ा मंच है, पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल खेलना है, तो घबराहट तो होगी ही। मगर साथ ही, हमारे पास दबाव को संभालने का काफी अनुभव है। उसी समय जब आप फाइनल खेलते हैं, तो आपको वर्तमान पल में रहना चाहिए और सिर्फ टीम के बारे में सोचना चाहिए। उस समय, मैं बस यही सोच रहा था कि टीम के लिए क्या कर सकता हूं, खासकर तब जब लगातार विकेट गिर रहे थे - जैसे जब (कप्तान श्रेयस) अय्यर आउट हुए। मैं सोच रहा था कि शुरुआती दो ओवरों में बस स्ट्राइक रोटेट करूं, क्योंकि हम वहां और विकेट नहीं खो सकते थे, वरना बाद में तेजी से रन नहीं बना पाते।”

उन्होंने आगे कहा, "मैं यही सोच रहा था और शिवम दुबे से भी यही बात कर रहा था कि बस एक-दो ओवर खेलो, उसके बाद तो हम तेजी से रन बना ही लेंगे और हमारे पास अच्छे शॉट्स हैं, जब चाहें छक्के लगा सकते हैं। मगर बात यह थी कि अगले दो ओवरों में विकेट नहीं खोना था, दुबे के साथ मैंने यही प्लान बनाया था और आखिर में आपने देखा ही, हमने बोर्ड पर काफी रन बना लिए।"

व्यक्तिगत तौर पर तिलक ने अपने करीबियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "जाहिर है कि यह मेडल देश को, भारत को समर्पित होगा। हालांकि, अगर आप देखें, तो परिवार मेरे लिए बहुत अहम है और वे हमेशा मेरे साथ रहे हैं, इसलिए मैं यह मेडल अपने परिवार - मां और पिताजी - को भी समर्पित करना चाहता हूं।"

--आईएएनएस

एसएम/डीकेपी