गांव-गांव फॉर्म भरवाए, फिर भी हजारों मतदाता बाहर, ज्ञानेश कुमार दें इस्तीफा: नौशाद सिद्दीकी
कोलकाता, 23 सितंबर (आईएएनएस)। इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के चेयरमैन नौशाद सिद्दीकी ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि शुरुआत में बताया गया था कि जिन मतदाताओं का नाम 2002 की मतदाता सूची में है, उन्हें अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। बाद में यह भी कहा गया कि यदि मतदाता का अपना नाम 2002 की सूची में नहीं है, लेकिन उसके पिता, माता, दादा या दादी का नाम उस सूची में दर्ज है तो भी अतिरिक्त कागजात की जरूरत नहीं होगी।
इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के चेयरमैन नौशाद सिद्दीकी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि इन निर्देशों के आधार पर आईएसएफ ने गांव-गांव जाकर लोगों से एसआईआर फॉर्म भरवाने का अभियान चलाया। हालांकि, उनके अनुसार बाद में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं के नाम प्रक्रिया के दौरान प्रभावित हुए, जिनका या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम 2002 की मतदाता सूची में मौजूद था। उन्होंने दावा किया कि इससे बड़ी संख्या में मतदाता मतदान प्रक्रिया से बाहर रह गए।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष लगातार सवाल उठाए गए, लेकिन उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। सिद्दीकी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग भी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण जिन क्षेत्रों में चुनावी मुकाबला कुछ सौ या कुछ हजार वोटों के अंतर से हुआ, वहां प्रभावित मतदाताओं की संख्या काफी अधिक थी। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं।
सिद्दीकी ने नंदी विक्रम से जुड़े भाजपा उम्मीदवार हासी रानी रावत की शैक्षणिक योग्यता और जन्म संबंधी दावों को लेकर चल रही चर्चा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर अदालत में भी मामला विचाराधीन है। उनके अनुसार, यदि उम्मीदवार के खिलाफ लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं और नामांकन नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार नामांकन रद्द होने का सवाल उठ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड अदालत के विचाराधीन हैं, इसलिए अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
सिद्दीकी ने आईएसएफ के चुनाव चिह्न को लेकर भी चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी को पहले जो चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था, बाद में उसे बदलकर दूसरे उम्मीदवार/पार्टी को दे दिया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र देकर शिकायत की गई, लेकिन उन्हें जवाब नहीं मिला। इसके बाद पार्टी ने संबंधित दस्तावेजों के साथ अदालत का रुख किया है।
--आईएएनएस
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