गैंगरेप पीड़िता ने SP को लिखा लेटर, बताई दरिंदगी की कहानी, बोलीं ‘सर, ऑर्डर करिए, मैं हैवानों से लूंगी बदला…’
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने गैंगरेप के बाद धर्म परिवर्तन का दबाव और जान से मारने की धमकी झेलने का आरोप लगाया है। पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटक रही है लेकिन अब तक उसे किसी भी स्तर पर संतोषजनक सुनवाई नहीं मिली है। पुलिस की कार्यप्रणाली से निराश पीड़िता शुक्रवार को एसपी सिटी व्योम बिंदल से मिली और कार्रवाई की मांग करते हुए आरोपियों से खुद बदला लेने की इजाजत मांगी।
गैंगरेप और लचर जांच व्यवस्था
पीड़िता ने बताया कि 13 दिसंबर 2023 को उसके साथ तीन युवकों ने मिलकर गैंगरेप किया था। इस गंभीर मामले की शिकायत उसने स्थानीय पुलिस अधिकारियों से लेकर सीएम पोर्टल तक की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता के अनुसार, 26 अप्रैल 2024 को वह लखनऊ में लगे जनता दरबार में भी गई थी, जहां उसके प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए पुलिस को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद देहात कोतवाली पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
“मुझे सजा दे दो, मैं बदला ले लूंगी”
न्याय की आस में टूट चुकी पीड़िता ने पुलिस लाइन में अधिकारियों से कहा, “अगर आप लोग इंसाफ नहीं दे सकते तो मुझे सजा देने की इजाजत दें, मैं खुद आरोपियों से बदला ले लूंगी।” यह बयान न केवल उसकी पीड़ा को दर्शाता है बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
धमकी और उत्पीड़न का सिलसिला जारी
पीड़िता ने बताया कि 27 अप्रैल को उसे बुरी तरह पीटा गया और उसके घर की बिजली भी काट दी गई। जब वह बिजली घर शिकायत करने पहुंची तो उससे कहा गया कि प्रधान से पत्र लाकर फाइल लगवानी पड़ेगी। जब वह प्रधान के पास गई तो धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया और जान से मारने की धमकी दी गई।
एसपी सिटी ने दिए जांच के आदेश
पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपी सिटी व्योम बिंदल ने कहा है कि युवती की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और मामले की जांच करवाई जाएगी। कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, पीड़िता का आरोप है कि पुलिस प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई शून्य है।
यह मामला न केवल एक महिला के साथ हुए जघन्य अपराध को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कानूनी प्रक्रिया में देरी और पुलिस की निष्क्रियता किस तरह से पीड़ित को आत्म-न्याय की सोच तक पहुंचा देती है। अब देखना होगा कि क्या सहारनपुर पुलिस इस बार पीड़िता की आवाज को गंभीरता से लेती है या मामला एक और फाइल में दफन होकर रह जाएगा।