रोडवेज की नि:शुल्क यात्रा योजना में फर्जीवाड़ा, बस सारथी और एसटीडी गिरोह के सदस्य जिम्मेदार
राज्य में रोडवेज की नि:शुल्क यात्रा योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में पता चला है कि रोडवेज बसों को ठेके पर लेने वाले कई बस सारथी एसटीडी गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर योजना का गलत फायदा उठा रहे थे, जिससे सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा था।
सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह योजना का लाभ उठाने के लिए नकली दस्तावेज़ और पास बनवाता था। कई लोग वास्तविक पात्र न होते हुए भी योजना के तहत मुफ्त यात्रा का लाभ उठा रहे थे। इससे सरकार के नियंत्रण और निगरानी तंत्र की खामियां उजागर हुईं।
सड़क परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस फर्जीवाड़े की पहचान तब हुई जब रोडवेज की नियमित ऑडिट टीम ने यात्रियों और पास धारकों की जानकारी की जांच की। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य आम जनता, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों को सुविधा देना था, लेकिन कुछ लोग इसे व्यक्तिगत लाभ के लिए दुरुपयोग कर रहे थे।
जांच में यह भी पता चला कि फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह ने एसटीडी और अन्य निजी माध्यमों के माध्यम से नकली पास और टिकट जारी किए। इससे न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि योजना की साख और जनता के बीच विश्वास भी प्रभावित हुआ।
राज्य सरकार ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए विशेष जांच टीम गठित की है। अधिकारियों ने बताया कि टीम फर्जीवाड़े में शामिल सभी सदस्यों, बस मालिकों और एसटीडी गिरोह के सहयोगियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक योजनाओं में इस तरह के फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा कारण निगरानी की कमजोरियाँ और पारदर्शिता की कमी होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि डिजिटल टिकटिंग, ई-पास और नियमित ऑडिट जैसी तकनीकों के माध्यम से फर्जीवाड़े को काफी हद तक रोका जा सकता है।
स्थानीय यात्रियों और नागरिकों ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार को योजना को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और पात्र लोगों तक ही लाभ पहुंचाने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि फर्जीवाड़ा रोकने के लिए यात्रियों की पहचान के लिए सख्त नियम लागू किए जाएँ।