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फ्रांस हिंसा पर अराघची के बयान से भड़का इजरायल, ग‍िदोन सार बोले- आतंकवाद फैलाने वाले दे रहे आजादी का ज्ञान

 

यरूशलम, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों पर दिए गए बयान के बाद इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि जो सरकार अपने ही देश में प्रदर्शनकारियों को फांसी देती है, वही अब पेरिस को प्रदर्शन की आजादी पर ज्ञान दे रही है।

गिदोन सार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्‍ट किया, ''ईरान के विदेश मंत्री फ्रांस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। जो सरकार अपने ही देश में प्रदर्शन करने वालों को फांसी देती है और विदेशों में आतंकवाद फैलाने के आरोप झेलती है, वही अब पेरिस को 'सभा और प्रदर्शन की आजादी' पर भाषण दे रही है।"

उन्‍होंने पोस्‍ट में आगे ल‍िखा, ''लोग अभी तक यह नहीं भूले हैं कि जनवरी में ईरानी सरकार ने अपने ही हजारों नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। इसके अलावा, दमन, हिंसा और फांसी जैसी घटनाएं आज भी जारी हैं।''

इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फ्रांस की इस हालत के ल‍िए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को ज‍िम्‍मेदार ठहराते हुए कहा था क‍ि फ्रांस की जनता बड़े स्तर पर बदलाव चाहती है।

अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर पोस्‍ट किया था, ''मैक्रों ने खुद ही यह स्थिति पैदा की थी, जब उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को भरोसा दिलाया कि उन्हें ईरानियों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर कोई आपत्ति नहीं है। अब उस युद्ध के लिए दूसरों को दोष देने में बहुत देर हो चुकी है, जिसे उनके जैसे लोगों ने पैदा करने में मदद की थी। फ्रांस की जनता बड़े स्तर पर बदलाव चाहती है, जिसमें शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अपनी बात रखने की आजादी भी शामिल है। मिस्टर राष्ट्रपति, फ्रांस के भविष्य की आवाज को सुनिए।''

इससे पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने भी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपनी ही बातों से सबक लेने की सलाह दी। बाघेई ने मैक्रों को 'प्रदर्शन के अधिकार' की बात याद द‍िलाई जो उन्‍होंने जनवरी में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कही थी।

बाघेई ने पूछा कि ईरान और फ्रांस में होने वाले प्रदर्शनों को लेकर अलग-अलग रवैया क्‍यों? उन्‍होंने कहा क‍ि अब जब संकट की स्थिति फ्रांस के अपने दरवाजे तक पहुंच गई है और अमेरिका में भी 'नो किंग्स' जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं, तो मैक्रों को इतिहास से सबक लेना चाहिए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर मैक्रों को संबोधित करते हुए बाघेई ने कहा कि इस साल जनवरी में फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 'बिना किसी डर और सजा के शांतिपूर्ण प्रदर्शन' का समर्थन किया था।

--आईएएनएस

एवाई/एबीएम