पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने नई गाइडलाइंस को लेकर जताई चिंता, ओबीसी जोड़ने को असमानता करार
आईएएनएस से बातचीत में पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने नई गाइडलाइंस को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इन गाइडलाइंस के कारण एससी और एसटी के बीच असमानता पैदा होने की संभावना है।
पूर्व राज्यपाल ने बताया कि पहले, 2012 में जारी गाइडलाइंस में केवल एससी और एसटी समुदाय शामिल थे। इन गाइडलाइंस का उद्देश्य था कि सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को समान अवसर और संरक्षण मिले।
लेकिन अब नई गाइडलाइंस में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को भी शामिल किया गया है। इस बदलाव के कारण कलराज मिश्र का मानना है कि अलग-अलग जातियों के आधार पर भेदभाव और असमानता पैदा होने का खतरा है। उन्होंने कहा, "ऐसा करना सही नहीं होगा। सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए और किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।"
पूर्व राज्यपाल ने जोर देकर कहा कि गाइडलाइंस का उद्देश्य समान अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए, न कि अलग-अलग वर्गों में अंतर करना। उनका कहना है कि अगर ओबीसी को जोड़ने के कारण एससी और एसटी के अधिकारों में कमी या छूट आती है, तो यह सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि जातिगत आधार पर भेदभाव रोकने के लिए कानून और नीतियां समान रूप से लागू होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गाइडलाइंस का उद्देश्य केवल पिछड़े और वंचित वर्गों को अवसर देना होना चाहिए, न कि किसी समूह को अन्य के मुकाबले बढ़त देना।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी मानना है कि नई गाइडलाइंस के लागू होने से सामाजिक और शैक्षणिक असमानता बढ़ सकती है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि गाइडलाइंस तैयार करने में सभी वर्गों के अधिकारों और हितों को समान रूप से ध्यान में रखा जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मुद्दे पर चर्चा सिर्फ नीति तक सीमित नहीं रहेगी। यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का भी विषय बन सकती है, क्योंकि जातिगत आधार पर अवसर और आरक्षण का प्रश्न देशभर में संवेदनशील मुद्दा रहा है।
पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र का यह बयान यह स्पष्ट करता है कि समानता और निष्पक्षता समाजिक नीतियों की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस तरह की गाइडलाइंस को लागू करने से पहले सभी पहलुओं का व्यापक अध्ययन और विचार किया जाए, ताकि किसी वर्ग के अधिकारों का हनन न हो।
कुल मिलाकर, नई गाइडलाइंस में ओबीसी को जोड़ने को लेकर पूर्व राज्यपाल की चिंता और सामाजिक दृष्टिकोण महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि किसी भी नीति में समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित होना आवश्यक है, ताकि समाज के सभी वर्गों को समान अधिकार और अवसर मिल सकें।