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घड़ी भूल जाओ! पायलट ने बताया सूरज से समय जानने का हैरान कर देने वाला तरीका, वीडियो हुआ वायरल

 

अक्सर, जब हम पहाड़ों पर ट्रेकिंग के लिए निकलते हैं या समुद्र के किनारे शाम बिताते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है: "अंधेरा होने में अभी कितना समय बाकी है?" अब, इस सवाल का जवाब जानने के लिए आपको अपनी जेब से फ़ोन निकालने की ज़रूरत नहीं है। 'Grittywheels' नाम के एक अकाउंट द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर ऐसी धूम मचा दी है कि देखने वाले हैरान रह गए हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि हमारे देश के बहादुर पायलट एक पुरानी लेकिन ज़बरदस्त तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, जिससे वे सूरज की स्थिति देखकर ही पल भर में समय का अंदाज़ा लगा लेते हैं।

चार उंगलियों वाली तरकीब: डूबते सूरज की पहेली को सुलझाना

इस कमाल की तरकीब को समझना काफ़ी आसान है। वीडियो में बताया गया है कि आपको अपनी हथेली को क्षितिज (वह जगह जहाँ धरती और आसमान मिलते हुए दिखाई देते हैं) और सूरज के बीच रखना चाहिए। हर उंगली को लगभग 15 मिनट के समय अंतराल का प्रतीक माना जाता है। इसका मतलब है कि अगर आपकी चार उंगलियाँ सूरज और ज़मीन के बीच की जगह में आसानी से समा जाती हैं, तो आप बेझिझक यह मान सकते हैं कि सूरज डूबने में अभी पूरा एक घंटा बाकी है। इस तरीके को 'नेचुरल नेविगेशन' (प्राकृतिक दिशा-निर्देशन) के नाम से जाना जाता है। पुराने ज़माने में—GPS के आने से बहुत पहले—हमारे बड़े-बुज़ुर्ग और सैनिक प्रकृति के संकेतों को ठीक इसी तरह समझते थे।

जीवित रहने के कौशल की ताक़त: क्या यह तरीका 100% सटीक है?

अब, आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा: क्या यह तरीका सचमुच एक कलाई घड़ी जितनी सटीकता से काम करता है? सच कहूँ तो, यह महज़ एक अंदाज़ा है—एक 'फ़ील्ड जजमेंट' (मौके पर लिया गया अंदाज़ा)। फ़ौजी ट्रेनिंग के दौरान 'जीवित रहने के कौशल' (survival skills) इसलिए सिखाए जाते हैं, ताकि संकट के पलों में—जब सारे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट काम करना बंद कर दें—तो प्रकृति ही आपकी मदद कर सके।

भले ही आज के ज़माने के पायलट अत्याधुनिक रडार सिस्टम और हाई-टेक मशीनों से लैस हों, लेकिन यह 'देसी जुगाड़' आज भी उतना ही दिलचस्प बना हुआ है। हालाँकि, मौसम के हालात और भौगोलिक स्थिति के आधार पर इस तरीके की सटीकता में थोड़ा-बहुत फ़र्क आ सकता है, लेकिन पहाड़ों में भटकने वालों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।