फुटबॉल चिह्न पर ऋतब्रत बनर्जी का तंज, साल्ट लेक स्टेडियम की मूर्ति का दिया हवाला, सौगत रॉय ने आदेश को बताया अस्थायी
कोलकाता, 18 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही गुटबाजी के बीच चुनाव आयोग (ईसीआई) ने गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। इस फैसले के बाद सियासत तेज हो गई है।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, "हमने इस पर मिलकर चर्चा की और शुक्रवार सुबह ईसीआई को पत्र लिखा। हमारी तीन प्राथमिकताएं, पहला- नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस, दूसरी- पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस और तीसरी- डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस, थीं।
चुनाव चिह्न के लिए, लिफाफा हमारी पहली प्राथमिकता थी। चुनाव आयोग के पत्र में साफ बताया गया है कि नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस नाम क्यों नहीं मिल सकते थे, इसलिए हमें डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफे का चुनाव चिह्न दिया गया।"
वहीं, चुनाव चिह्न को लेकर उन्होंने तंज भी कसा। उन्होंने कहा, "नहीं, फुटबॉल नहीं। मैंने सुना है कि कोई अब फुटबॉल खेल रहा है। आपको साल्ट लेक स्टेडियम का मामला याद होगा, जिसे विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन के नाम से भी जाना जाता है। वहां एक अजीब सी मूर्ति थी, जिसमें किसी व्यक्ति को नहीं दिखाया गया था, बस कोई फुटबॉल को किक मार रहा था। उसे हटा दिया गया है। शायद उसका भी कुछ असर रहा हो। हो सकता है कि जिस व्यक्ति को यह विचार आया, उसने ही यह चुनाव चिह्न लेने का सुझाव दिया हो।"
दूसरी ओर, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने चुनाव आयोग के इस आदेश को अस्थायी बताया। टीएमसी को नया नाम और चुनाव चिह्न मिलने पर उन्होंने कहा, "कोई प्रतिक्रिया नहीं। यह आदेश सिर्फ दो उपचुनावों के लिए अस्थायी है, इसलिए हम इस आदेश को नहीं मानते। मुझे नहीं लगता कि यह कोई स्थायी आदेश है।"
नंदीग्राम सीट पर टीएमसी के चुनाव न लड़ने के सवाल पर सौगत रॉय ने नाराजगी जताते हुए कहा, "इसकी घोषणा पहले ही हो चुकी है, आप मुझसे फिर क्यों पूछ रहे हैं? मुझे यह समझ नहीं आ रहा। अखबार की यह कैसी पॉलिसी है?"
वहीं, टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "देखिए, नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कब गिरफ्तार किया गया? जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस को अपनी पार्टी का समर्थन देने का ऐलान किया। यह घबराहट में लिया गया फैसला है। यह एक फासीवादी सरकार है। वे क्या कर रहे हैं? पुलिस राज चल रहा है।"
बता दें कि उपचुनाव से पहले टीएमसी में नाम और निशान को लेकर मचा घमासान और नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी ने बंगाल की सियासत को और गरमा दिया है।
--आईएएनएस
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