यूपी-बिहार में बाढ़ की आफत: नदियां खतरे के निशान पार, बिहार के तीन-चौथाई हिस्से में सिर्फ पानी ही पानी!
देश के कई हिस्सों में मानसून की विदाई शुरू हो चुकी है, लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति अभी भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। बिहार में गंडक नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और तटबंधों में टूट के बाद कई इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश में बारिश भले ही थम गई हो, लेकिन गंगा, घाघरा, सई और दूसरी नदियों का जलस्तर अब भी ऊंचा बना हुआ है।
बिहार में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित
बिहार में नेपाल में हुई बारिश और गंडक बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ का संकट बढ़ा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक राज्य के 6 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और करीब 4.93 लाख लोगों पर इसका असर पड़ा है। राहत और बचाव के लिए NDRF और SDRF की कुल 41 टीमें तैनात की गई हैं।सारण में गंडक नदी का पानी नए इलाकों में प्रवेश कर रहा है। तटबंध टूटने के बाद कई गांवों में पानी फैल गया है और लोगों को सुरक्षित स्थानों तथा तटबंधों पर शरण लेनी पड़ रही है। प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं।
सारण में हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिपोर्टों के मुताबिक जिले के 170 गांवों में करीब 3.32 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और 43 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत अभियान में हेलिकॉप्टर के जरिए सूखा राशन भी पहुंचाया जा रहा है।
कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के ऊपर
बिहार में सिर्फ गंडक ही नहीं, बल्कि गंगा, कोसी, बागमती और घाघरा समेत कई नदियों के जलस्तर को लेकर भी चिंता बनी हुई है। केंद्रीय जल आयोग ने कई स्थानों पर गंभीर बाढ़ की स्थिति को लेकर ऑरेंज बुलेटिन जारी किया है। गंगा भी कई जगह खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
राहत अभियान के दौरान सारण में एक दुखद घटना भी सामने आई। बाढ़ प्रभावित इलाके में हेलिकॉप्टर से राहत सामग्री गिराए जाने के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई। अधिकारियों के मुताबिक मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम के बाद मौत की सही वजह स्पष्ट होगी।
उत्तर प्रदेश में बारिश थमी, लेकिन नदियों का खतरा बरकरार
उत्तर प्रदेश में शनिवार सुबह कई इलाकों में मौसम साफ रहा और बारिश में कमी आई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है। कई नदियों में पानी अब भी ऊंचे स्तर पर है।
उन्नाव में गंगा के साथ सई, कल्याणी और लोन नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। कई गांवों के आसपास पानी पहुंच गया है और खेतों में खड़ी फसलें लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण खराब हो रही हैं। कई ग्रामीण इलाकों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
रायबरेली में भी सई नदी का पानी गांवों में पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं और कुछ इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ है।
गोंडा में भी घाघरा नदी के बढ़े जलस्तर से कई गांव प्रभावित हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में नावों और राहत व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।
देश के दूसरे हिस्सों में भी मौसम का असर
बिहार और यूपी के अलावा देश के कई राज्यों में मौसम अलग-अलग रंग दिखा रहा है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। वहीं उत्तर भारत के कई इलाकों में मानसून की वापसी के साथ मौसम धीरे-धीरे शुष्क होने लगा है।
राजस्थान में दूसरी तरफ अक्टूबर की शुरुआत के बावजूद कई इलाकों में दिन का तापमान 40 डिग्री के पार बना हुआ है। यानी एक तरफ बिहार और यूपी में बाढ़ से लोग परेशान हैं, तो दूसरी तरफ राजस्थान के कुछ हिस्सों में गर्मी अभी भी अपना असर दिखा रही है।फिलहाल बिहार में सबसे बड़ी चिंता गंडक और दूसरी नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर है। प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान चला रही हैं। वहीं यूपी में बारिश कम होने के बावजूद लोगों को नदियों के जलस्तर पर नजर रखने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।