आईएएस भारती दीक्षित के पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द, हाईकोर्ट ने आपसी सहमति से हुए समझौते को माना आधार
राजस्थान हाईकोर्ट ने आईएएस अधिकारी भारती दीक्षित की ओर से उनके पति आशीष मोदी के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने पारिवारिक न्यायालय में दोनों पक्षों के बीच हुए आपसी समझौते और सहमति से तलाक को आधार मानते हुए यह राहत प्रदान की। साथ ही कोर्ट ने उच्च पदस्थ अधिकारियों को निजी विवादों को परिपक्वता और संयम के साथ सुलझाने की नसीहत भी दी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि भारती दीक्षित और आशीष मोदी के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद अब समाप्त हो चुका है। दोनों ने पारिवारिक न्यायालय में 15 दिसंबर 2025 को आपसी सहमति से तलाक ले लिया है और आपसी समझौते के तहत सभी मतभेद सुलझा लिए हैं। ऐसे में लंबित आपराधिक प्रकरण को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत समझौते को रिकॉर्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने माना कि जब पति-पत्नी ने सहमति से अपने रिश्ते को खत्म कर दिया है और किसी प्रकार का विवाद शेष नहीं है, तो एफआईआर को बनाए रखना न्यायसंगत नहीं होगा। इसी आधार पर अदालत ने एफआईआर रद्द करने का आदेश पारित किया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि उच्च प्रशासनिक पदों पर कार्यरत अधिकारियों से समाज को जिम्मेदार और संतुलित व्यवहार की अपेक्षा होती है। ऐसे में व्यक्तिगत विवादों को सार्वजनिक या आपराधिक मुकदमों में बदलने के बजाय आपसी संवाद और समझदारी से सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैवाहिक मामलों में दोनों पक्ष समझौते पर पहुंच जाते हैं और आपसी सहमति से अलग होने का निर्णय लेते हैं, तो अदालतें अक्सर आपराधिक मामलों को समाप्त करने पर विचार करती हैं, ताकि अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सके।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रहा यह विवाद समाप्त हो गया है। न्यायालय की इस टिप्पणी को प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है कि निजी जीवन के मामलों में संयम और परिपक्वता बनाए रखना आवश्यक है।