G20 बैठक में रूस पर घमासान! लावरोव के साथ फोटो खिंचवाने से कई देशों का इनकार, अमेरिका ने रद्द किया ग्रुप फोटो सेशन
अमेरिका के अटलांटा में आयोजित G20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस को लेकर बड़ा कूटनीतिक विवाद सामने आया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर पश्चिमी देशों और रूस के बीच तनाव का असर बैठक के पहले दिन भी देखने को मिला। हालात ऐसे बने कि विदेश मंत्रियों का प्रस्तावित ग्रुप फोटो सेशन ही रद्द करना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक, कई देशों ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ तस्वीर खिंचवाने से इनकार कर दिया था। कुछ देशों ने चेतावनी दी थी कि यदि लावरोव के साथ फोटो सेशन हुआ, तो वे इसमें शामिल नहीं होंगे।
इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने ग्रुप फोटो सेशन रद्द करने का फैसला लिया। हालांकि, इस विवाद का असर बैठक के अन्य कार्यक्रमों पर नहीं पड़ा और विदेश मंत्रियों के बीच निर्धारित एजेंडे के अनुसार बातचीत जारी रही। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया कि रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मतभेद अभी भी गहरे हैं।
यह दो दिवसीय बैठक 30 और 31 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के अटलांटा शहर में आयोजित की जा रही है। इसकी मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कर रहे हैं। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी बैठक में शामिल हुए हैं।
रूस के विदेश मंत्री के साथ फोटो खिंचवाने से क्यों पीछे हटे देश?
समाचार एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में शामिल कई देशों ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ आधिकारिक ग्रुप फोटो में हिस्सा लेने पर आपत्ति जताई। इन देशों की नाराजगी की मुख्य वजह यूक्रेन पर रूस का सैन्य हमला बताया गया।
पश्चिमी देशों के कई नेताओं का मानना है कि रूस के साथ सामान्य कूटनीतिक तस्वीर साझा करना यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर गलत संदेश दे सकता है। इसी वजह से कुछ प्रतिनिधिमंडलों ने फोटो सेशन में भाग नहीं लेने की चेतावनी दी।
स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने ग्रुप फोटो सेशन रद्द कर दिया। इस फैसले से संभावित सार्वजनिक विवाद को टालने की कोशिश की गई, जबकि बैठक की औपचारिक बातचीत जारी रही।
हालांकि, फोटो सेशन रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि बैठक में शामिल सभी देशों ने रूस के खिलाफ एक जैसा रुख अपनाया। G20 में सदस्य देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अलग-अलग विचार और प्राथमिकताएं हैं।
ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने जताई आपत्ति
रिपोर्ट में कई देशों के विदेश मंत्रियों की ओर से रूस के साथ तस्वीर खिंचवाने को लेकर आपत्ति जताए जाने का उल्लेख किया गया है।
ब्रिटेन: ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने रूस के साथ ग्रुप फोटो में शामिल होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन कई वर्षों से रूस के साथ इस तरह की तस्वीरें नहीं खिंचवाता है।
जर्मनी: जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने रूस के साथ सामान्य संबंध नहीं होने की बात कही। उनका रुख यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोपीय देशों की चिंताओं को दर्शाता है।
ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने यूक्रेन पर रूस के हमले की आलोचना करते हुए कहा कि उनका देश इस कार्रवाई को स्वीकार नहीं करता।
कनाडा: कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने रूस को बैठक में आमंत्रित किए जाने पर ही सवाल उठाए। उन्होंने लावरोव की मौजूदगी को लेकर आपत्ति जताई।
पोलैंड: पोलैंड के विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की ने भी रूस के साथ तस्वीर खिंचवाने को लेकर अपनी असहमति व्यक्त की। हालांकि, पोलैंड G20 का स्थायी सदस्य नहीं है और उसे इस बैठक में अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
इन आपत्तियों के बाद ग्रुप फोटो सेशन रद्द करने का फैसला बैठक के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में शामिल हो गया।
दक्षिण अफ्रीका को न्योता नहीं मिलने पर भी विवाद
G20 विदेश मंत्रियों की बैठक शुरू होने से पहले ही अमेरिका की मेजबानी को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। दक्षिण अफ्रीका को इस बैठक में आमंत्रित नहीं किए जाने पर सवाल उठे।
दक्षिण अफ्रीका G20 का सदस्य है और अफ्रीकी महाद्वीप का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने इस बार दक्षिण अफ्रीका को बैठक में नहीं बुलाया।
अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के बीच गाजा युद्ध, ईरान से संबंधों, नस्लीय नीतियों और व्यापार जैसे मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। इन विवादों ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है।
दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रित नहीं किए जाने से G20 की समावेशिता और सभी सदस्य देशों की भागीदारी को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। हालांकि, इस मुद्दे पर दोनों देशों के आधिकारिक रुख और बैठक से जुड़े निर्णयों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
यूक्रेन को भी बैठक से रखा गया बाहर
G20 बैठक को लेकर दूसरा बड़ा विवाद यूक्रेन को आमंत्रित नहीं किए जाने से जुड़ा है। यूक्रेन G20 का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन पहले कुछ अंतरराष्ट्रीय बैठकों में उसे अतिथि के रूप में शामिल किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने इस बार केवल औपचारिक सदस्य देशों को आमंत्रित करने का फैसला किया। इसी वजह से यूक्रेन को बैठक में जगह नहीं मिली।
इस निर्णय पर कुछ यूरोपीय देशों ने नाराजगी जताई। उनका मानना है कि जब बैठक में रूस के विदेश मंत्री शामिल हैं और यूक्रेन युद्ध चर्चा का प्रमुख विषय है, तो यूक्रेन को आमंत्रित नहीं किया जाना सवाल खड़े करता है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति प्रयासों, सुरक्षा और भविष्य की कूटनीतिक रणनीति पर लगातार चर्चा हो रही है।
पोलैंड को निमंत्रण, रूस ने उठाए सवाल
अमेरिका ने पोलैंड को G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अमेरिकी प्रशासन पोलैंड को भविष्य में G20 का स्थायी सदस्य बनाने का समर्थन करता है।
हालांकि, रूस की ओर से इस विचार पर आपत्ति जताए जाने की जानकारी सामने आई। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि G20 में नए सदस्यों और अतिथियों को शामिल करने के लिए सभी देशों की सहमति आवश्यक है।
इस मुद्दे ने G20 के विस्तार, सदस्यता और मेजबान देश की भूमिका को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है। G20 वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े प्रमुख देशों का मंच है, जहां सदस्यता और प्रतिनिधित्व के मुद्दे राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
साझा बयान पर सहमति बनाना भी चुनौती
बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा कई अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी मतभेद सामने आए। इनमें ईरान से जुड़े तनाव, अमेरिकी टैरिफ, दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियां और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा जैसे विषय शामिल रहे।
होर्मुज जलडमरूमध्य सहित प्रमुख समुद्री रास्तों से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही भी चर्चा का महत्वपूर्ण मुद्दा रही। इन रास्तों पर किसी तरह की बाधा आने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
अलग-अलग देशों के हितों और विचारों में अंतर होने के कारण बैठक के अंत में सभी देशों की सहमति से साझा बयान जारी करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, किसी साझा बयान के जारी होने या न होने की अंतिम स्थिति की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही की जानी चाहिए।
जयशंकर ने कूटनीति और सुरक्षित समुद्री रास्तों पर दिया जोर
बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का हल निकालने के लिए बातचीत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
जयशंकर ने आतंकवाद के खतरे को गंभीरता से लेने, समुद्री रास्तों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने और नाविकों पर हमले रोकने की आवश्यकता भी उठाई।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समुद्री मार्गों में बाधा और सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव का असर विकासशील देशों पर अधिक पड़ सकता है। ईंधन, खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने से इन देशों की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
भारत का रुख रहा है कि वैश्विक संकटों का समाधान बातचीत, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नियमों के सम्मान के जरिए तलाशा जाना चाहिए। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की ऊर्जा और व्यापार संबंधी जरूरतें काफी हद तक समुद्री परिवहन पर निर्भर हैं।
अगले महीने अमेरिका में होगी G20 नेताओं की बैठक
विदेश मंत्रियों की यह बैठक 31 अक्टूबर को समाप्त होनी है। इसके बाद अगले महीने अमेरिका के फ्लोरिडा में G20 देशों के नेताओं की बैठक प्रस्तावित है, जिसकी मेजबानी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।
इस बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और प्रमुख भू-राजनीतिक विवादों पर चर्चा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसमें शामिल होने की संभावना भी जताई गई है, लेकिन उनकी यात्रा की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद ही मानी जानी चाहिए।
विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस को लेकर पैदा हुआ विवाद नेताओं की आगामी बैठक के माहौल पर भी असर डाल सकता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि ग्रुप फोटो सेशन रद्द होने से G20 के व्यापक एजेंडे पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
G20 बैठक में रूस को लेकर बढ़ा कूटनीतिक तनाव
अटलांटा में हुई इस घटना ने साफ कर दिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर अब भी बना हुआ है। ग्रुप फोटो सेशन जैसी औपचारिक प्रक्रिया का रद्द होना इस बात का संकेत है कि सदस्य देशों के बीच मतभेद केवल बंद कमरे की बातचीत तक सीमित नहीं हैं।
एक ओर कई देश रूस के सैन्य अभियान की आलोचना कर रहे हैं, तो दूसरी ओर G20 जैसे मंच पर सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने की चुनौती भी बनी हुई है। दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन को आमंत्रित नहीं किए जाने तथा पोलैंड की भागीदारी जैसे मुद्दों ने विवाद को और जटिल बनाया है।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक के शेष सत्रों में सदस्य देश किन मुद्दों पर सहमति बना पाते हैं और क्या आगामी G20 नेताओं की बैठक में इन मतभेदों को कम करने के लिए कोई ठोस कूटनीतिक पहल सामने आती है।