दक्षिण अफ्रीका: जोहान्सबर्ग में सात महिलाओं के शव मिलने से बढ़ा गुस्सा, फेमिसाइड को लेकर उठे सवाल
जोहान्सबर्ग, 16 सितंबर (आईएएनएस)। दक्षिण अफ्रीका के घनी आबादी वाले शहर जोहान्सबर्ग में पिछले कुछ महीनों में सात महिलाओं के शव अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के आसपास मिले। इसके बाद से ही महिलाओं की सुरक्षा और फेमिसाइड को लेकर देशभर में चिंता और आक्रोश बढ़ गया है। इनमें से पांच महिलाओं के शव पिछले एक सप्ताह के दौरान ही मिले। देश के उप-राष्ट्रपति पॉल माशातिले ने इसकी निंदा करते हुए बुधवार को एक बयान जारी किया।
माशातिले ने बयान में कहा, "मैं राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और सभी दक्षिण अफ्रीकी लोगों के साथ मिलकर उन महिलाओं के परिवारों और करीबियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं, जिनकी इन भयानक हालात में जान चली गई है।"
माशातिले जस्टिस, क्राइम प्रिवेंशन एंड सिक्योरिटी (जेसीपीएस) क्लस्टर कैबिनेट कमेटी के प्रमुख भी हैं। उप राष्ट्रपति ने कहा, "हमारे समुदायों में जेंडर-बेस्ड वायलेंस (जीबीवी) के लिए कोई जगह नहीं है, और सभी पुरुषों को ऐसे हिंसा की निंदा करने और महिलाओं की सुरक्षा करने में सबसे आगे रहना चाहिए।"
मृतकों में 38 वर्षीय एलिजाबेथ ‘त्सोंत्सो’ मोसेलाकगोमो भी शामिल हैं, जो 9 सितंबर को दौड़ने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। उनके आठ वर्षीय बच्चे ने परिजनों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद उनकी तलाश शुरू की गई। उनका शव शनिवार को मिला और सोमवार को परिवार ने उनकी पहचान की।
पुलिस के अनुसार 15 जुलाई के बाद से केम्पटन पार्क इलाके में चार महिलाओं के शव बरामद किए गए थे। पुलिस ने बताया कि इन शवों पर चोट के निशान थे और महिलाएं कम कपड़ों में मिली थीं। इसके बाद सोमवार और मंगलवार को ओलिफैंट्सफोंटेन इलाके में दो और महिलाओं के शव मिले। मंगलवार को केम्पटन पार्क से करीब 25 मील दक्षिण-पूर्व में एक अन्य महिला का शव भी बरामद किया गया, जो नग्न अवस्था में था और काफी सड़ चुका था।
इन घटनाओं ने दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पहले से मौजूद चिंता को और गहरा कर दिया है। द गार्डियन के अनुसार, देश में महिलाओं की हत्या की दर दुनिया में सबसे अधिक दरों में शामिल है। साउथ अफ्रीका पुलिस के नवीनतम उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2024 को समाप्त हुए वर्ष में दक्षिण अफ्रीका में 27,600 से अधिक हत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें 5,578 पीड़ित महिलाएं थीं।
महिला अधिकार समूहों और आम नागरिकों ने पुलिस की उस अपील पर भी नाराजगी जताई है जिसमें महिलाओं से कहा गया कि वे अकेले पैदल चलने या दौड़ने से बचें, सुनसान इलाकों से दूर रहें और संभव हो तो समूह में यात्रा या व्यायाम करें।
महिला अधिकार संगठन विमेन फॉर चेंज ने कहा कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा को लेकर पहले से ही सावधानी बरतनी पड़ती है। संगठन ने सवाल उठाया कि महिलाओं के लापता होने और समुदायों के खोज अभियान शुरू करने के बाद ही किसी इलाके में इतनी व्यापक तलाश क्यों शुरू होती है।
पुलिस ने इन हत्याओं की जांच के लिए विशेष अधिकारियों को लगाया है। जांचकर्ताओं ने शुरुआत में यह संभावना भी देखी कि क्या इन घटनाओं के पीछे कोई सीरियल किलर हो सकता है। हालांकि पुलिस प्रवक्ता एथलेंडा माथे ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि हत्याओं के पीछे सीरियल किलर है। जुलाई में हुई पहली हत्या के मामले में मृत महिला के प्रेमी को हिरासत में लिया गया है। अन्य मामलों में संदिग्धों की पहचान या लिंग की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने मंगलवार को कहा, "मैंने पुलिस अधिकारियों को इन हत्याओं की जांच को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।" यह मुद्दा ऐसे समय में फिर सामने आया है जब देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा को लेकर लंबे समय से अभियान चल रहे हैं।
2025 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मुद्दे पर हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद रामाफोसा ने जेंडर आधारित हिंसा को राष्ट्रीय संकट घोषित किया था। लेकिन सोशल एक्टिविस्ट्स का कहना है कि घोषणा के बावजूद जमीन पर प्रभावी कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस उपायों की कमी बनी हुई है।
मोसेलाकगोमो की मौत ने उनके मित्रों और स्थानीय रनिंग क्लबों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। उनकी स्मृति में दक्षिण अफ्रीका के कई हिस्सों में रनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनके मित्रों का कहना है कि वह अपनी बेटी को लेकर बेहद समर्पित थीं और उनकी मौत ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया है।
--आईएएनएस
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