एफसीआरए संशोधन का उद्देश्य अल्पसंख्यकों का सफाया करना है: मुख्यमंत्री सतीशन
तिरुवनंतपुरम, 25 जून (आईएएनएस)। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा एफसीआरए अधिनियम में किया गया एकतरफा संशोधन आपत्तिजनक है।
उन्होंने कहा कि इस संशोधन से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसमें देश में स्वैच्छिक संगठन कार्य नहीं कर सकते। यह संदेह है कि क्या एफसीआरए संशोधन संघ परिवार संगठनों द्वारा देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ चलाए जा रहे तीव्र अभियान का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य उत्तर भारत के आदिवासी क्षेत्रों और उत्तर-पूर्वी राज्यों में शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियां संचालित करने वाले स्वैच्छिक संगठनों को समाप्त करना है। प्रशासन संघ परिवार संगठनों की मांग पर देश में किसी भी संगठन की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा सकता है।
सतीशन ने कहा कि केंद्र सरकार को अल्पसंख्यक समूहों को लक्षित करने वाले इस संशोधन को तुरंत वापस लेने के लिए तैयार रहना चाहिए।
दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के नियमों में किए गए संशोधन का विरोध जोर पकड़ रहा है। कांग्रेस और ईसाई चर्च संगठन इस कदम के खिलाफ अलग-अलग राजनीतिक और कानूनी चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
इससे पहले कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संशोधन को तत्काल वापस लेने की मांग की। उनका आरोप है कि संशोधित नियम अल्पसंख्यक समुदायों और संस्थानों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
उन्होंने तर्क दिया है कि ये बदलाव विदेशी अंशदान पर निर्भर संगठनों के लिए नई बाधाएं खड़ी कर सकते हैं और उनके प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता को कमजोर कर सकते हैं।
संसद में भी इस मुद्दे पर जोरदार चर्चा होने की संभावना है, और उम्मीद है कि आगामी सत्र में इंडिया ब्लॉक इस संशोधन का विरोध करने के लिए एक समन्वित रणनीति पर चर्चा करेगा।
विपक्षी दलों का कहना है कि नए प्रावधानों से अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा संचालित शैक्षणिक, धर्मार्थ और सामाजिक सेवा संस्थानों पर असमान रूप से प्रभाव पड़ सकता है।
आलोचना बढ़ने के बावजूद, केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह संशोधन को वापस लेने पर विचार नहीं कर रही है।
--आईएएनएस
एमएस/