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एफसीआई कर्मचारी के कथित वीडियो की होगी जांच, जीएम ने दिए कार्रवाई के संकेत

 

जम्मू, 26 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के जनरल मैनेजर आईके चौधरी ने एक कर्मचारी के कथित भारत-विरोधी वीडियो को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि वीडियो की पूरी जांच कराई जाएगी और यदि जांच में यह साबित होता है कि वीडियो संबंधित कर्मचारी का ही है, तो उसके खिलाफ नौकरी से निकालने तक की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी की जाति या धर्म नहीं, बल्कि देश और सरकार की योजनाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है।

आईके चौधरी ने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से कुछ वीडियो मिले हैं। यदि वीडियो में दिखाई देने वाली महिला कर्मचारी वही हैं और वीडियो में सुनाई दे रही आवाज भी उन्हीं की है, तो यह गंभीर और चिंताजनक मामला है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले दिन संबंधित कर्मचारी को शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा और उसका जवाब लिया जाएगा। इसके बाद पूरे मामले की विभागीय जांच होगी।

उन्होंने कहा कि जांच में यदि यह पुष्टि हो जाती है कि वीडियो उसी कर्मचारी का है और उसमें आपत्तिजनक या भारत-विरोधी बातें कही गई हैं, तो नियमों के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्रवाई कर्मचारी की पहचान, जाति या धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि उसके आचरण और नियमों के उल्लंघन के आधार पर होगी।

आईके चौधरी ने एफसीआई कर्मचारियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि निगम के कर्मचारी देश के विभिन्न हिस्सों में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं। एफसीआई कर्मचारी किसी भी जाति या धर्म के हों, वे देश के प्रति प्रतिबद्ध हैं और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) तथा भारत सरकार की योजनाओं को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं। अनंतनाग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां कठिन परिस्थितियों में भी एफसीआई कर्मचारी खाद्यान्न की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। उनके मुताबिक अनंतनाग में रेलवे के जरिए प्रतिदिन खाद्यान्न पहुंच रहा है और एफसीआई का स्टाफ उसे उतारने और आगे की व्यवस्था करने में जुटा है। ऐसे काम के लिए कर्मचारियों के समर्पण की जरूरत होती है और उनका स्टाफ इस जिम्मेदारी को निभा रहा है।

पीडीएस के जरिए कथित तौर पर खराब गुणवत्ता का गेहूं सप्लाई किए जाने की शिकायत पर भी आईके चौधरी ने जांच की पुष्टि की। उन्होंने गेहूं और अन्य अनाज में मौजूद फैट कंटेंट और नमी के बीच होने वाली प्रक्रिया का जिक्र करते हुए बताया कि सामान्य तौर पर गेहूं में लगभग 12 से 13.5 प्रतिशत तक नमी हो सकती है। यदि अनाज अधिक नमी ग्रहण कर ले और इसके साथ गर्मी तथा हवा का संपर्क हो, तो उसके अंदर खराब होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप कई बार आटे में कड़वाहट आने की संभावना रहती है। जुलाई-अगस्त के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में नमी काफी अधिक रहती है। ऐसे में गेहूं को स्टोर करने, पीसने और पीसे हुए आटे को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में विशेष सावधानी की जरूरत होती है।

आईके चौधरी ने बताया कि आटे में कड़वाहट आने के कई संभावित कारण हो सकते हैं। उन्होंने मुख्य रूप से चूहों से होने वाली समस्या, अल्फाटॉक्सिन और नमी, फैट कंटेंट, गर्मी तथा हवा के संपर्क से होने वाली प्रक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चूहों से जुड़ी समस्या आजकल पीडीएस दुकानों में भी काफी कम है। वहीं, अल्फाटॉक्सिन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जिस सैंपल का जिक्र किया गया है, उसमें भी उन्हें अल्फाटॉक्सिन की मौजूदगी नहीं मिली है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिस सैंपल की बात हो रही है, वह उनका संयुक्त रूप से लिया गया सैंपल नहीं था, इसलिए वे उसे अपना सैंपल नहीं मानते।

खराब गेहूं और कड़वे आटे की शिकायत पर उन्होंने मीडिया को अपने गोदाम में आकर गुणवत्ता की जांच करने का खुला प्रस्ताव भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार चाहें तो उनके सामने गोदाम से गेहूं निकाला जाएगा, उसे पीसा जाएगा और उसी से रोटियां बनाकर वे खुद भी खाएंगे और पत्रकार भी खा सकते हैं। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि गोदाम में मौजूद गेहूं की वास्तविक गुणवत्ता क्या है और उससे तैयार आटा कड़वा है या नहीं। चौधरी ने साफ शब्दों में कहा कि वह इस आरोप को स्वीकार नहीं करते कि कड़वा आटा एफसीआई की वजह से मिल रहा है।

गेहूं की गुणवत्ता से जुड़े भौतिक मानकों को लेकर उन्होंने कहा कि यदि किसी बोरे में लकड़ी के टुकड़े, खरपतवार के बीज या मिट्टी जैसे भौतिक पदार्थ अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में पाए जाते हैं, तो उन्हें सीधे मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त घोषित करने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत साल्वेजिंग की जाती है। इसके लिए एफसीआई डिपो में अतिरिक्त श्रमिकों की व्यवस्था की जाती है। गेहूं को खोलकर साफ किया जाता है और पंखे आदि की मदद से अनचाही सामग्री को अलग किया जाता है। उन्होंने कहा कि लकड़ी के टुकड़े, मिट्टी या अन्य भौतिक अशुद्धियों को हटाने की प्रक्रिया पहले भी घरों में अपनाई जाती रही है, जब लोग चक्की में गेहूं पिसवाने से पहले उसे साफ करते थे। गुणवत्ता जांच में केमिकल और फिजिकल पैरामीटर दोनों महत्वपूर्ण होते हैं और फिजिकल अशुद्धियों को निर्धारित प्रक्रिया के जरिए हटाया जाता है।

आईके चौधरी ने कहा कि एफसीआई अपने डिपो से गेहूं जारी करते समय उसकी गुणवत्ता को लेकर निर्धारित मानकों का पालन करता है। यदि किसी स्तर पर गुणवत्ता को लेकर शिकायत आती है तो उसकी जांच जरूरी है और संबंधित प्रक्रिया को देखा जाना चाहिए। गेहूं की गुणवत्ता का आकलन केवल एक शिकायत या वीडियो के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए सैंपलिंग, जांच और पूरी प्रक्रिया को देखना जरूरी है।

--आईएएनएस

पीएसके