फर्जी फर्म बनाकर सरकार को लगाया 27.30 लाख चूना, गिरोह के चार सदस्य गिरफ्तार
लखनऊ, 23 अगस्त (आईएएनएस)। लखनऊ क्राइम ब्रांच की टीम ने फर्जी दस्तावेजो के जरिये फर्म पंजीकृत करवाकर आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ लेकर करीब सवा 27.30 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने गिरोह के 4 लोगों को गिरफ्तार कर 6 मोबाइल बरामद किये हैं।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि वैभव सिंह, मो. अरसान, विकास कुमार और मो. साकिब को क्राइम ब्रांच की मदद से हसनगंज थाने की पुलिस के साथ गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों ने मेसर्स घनश्याम इंटरप्राइजेज नाम की फर्म बनाई थी।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक, 30 अगस्त 2025 को प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर मेसर्स घनश्याम इंटरप्राइजेज के संबंध में जांच की गई। इस फर्म द्वारा कच्चा सीसा अपशिष्ट, पेरिंग्स और प्लास्टिक के स्क्रैप की खरीद-बिक्री के लिए जीएसटीआईएन प्राप्त किया गया था।
जांच के दौरान फर्म के पंजीकरण एवं कारोबार से संबंधित दस्तावेजों में अनियमितताएं पता चली। फर्म के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग करते हुए विभिन्न फर्मों, कम्पनियों के साथ लेन-देन दर्शाकर फर्जी आईटीसी का दावा एवं पास-ऑन किए जाने और इस प्रक्रिया से सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाए जाने के तथ्य सामने आए। इसके बाद थाना हसनगंज में मुकदमा दर्ज किया गया।
गिरफ्तार आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीएसटी फर्म का उपयोग करते हुए विभिन्न कंपनियों और फर्मों से संपर्क किया जाता था। इसके बाद फर्जी आईटीसी को एक-दूसरे को पास-ऑन कर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जाता था। इस प्रकार कागजी लेन-देन के माध्यम से वास्तविक कारोबार के विपरीत फर्जी आईटीसी का नेटवर्क तैयार कर जीएसटी कर का अपवंचन किया जा रहा था, जिससे सरकारी राजस्व को लगभग 27.30 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
गिरफ्तार आरोपी वैभव सिंह (35) बीटेक है, जबकि मोहम्मद अरसान (32) एम. कॉम., विकास कुमार मिश्रा (35) बीए एलएलबी और मो. साकिब (28) ने बीए की पढ़ाई की है।
एडीसीपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही फर्जी जीएसटी फर्म एवं फर्जी आईटीसी के माध्यम से राजस्व को क्षति पहुंचाने वाले अन्य संभावित सहयोगियों एवं संबंधित फर्मों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
--आईएएनएस
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